Summer express , मोनिका रावत ,चंडीगढ़। पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (डीए) के बकाया भुगतान से जुड़े मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाई कोर्ट के आदेशों की कथित अवहेलना और पंजाब के मुख्य सचिव के खिलाफ प्रथम दृष्टया आपराधिक अवमानना के मुद्दे को रोस्टर के अनुसार अवमानना संबंधी मामलों की सुनवाई करने वाली पीठ के समक्ष भेजने का निर्देश दिया गया है। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने मुख्य सचिव की तरफ से बिना शर्त माफी मांगने की पेशकश भी की, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की गरिमा से किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने कहा कि न्यायालय का दायित्व है कि उसकी गरिमा किसी भी तरह प्रभावित न हो। अदालत की कार्यवाही की औचित्यता या उसके संचालन पर सवाल उठाने वाले सुझावों से भी सावधानीपूर्वक निपटना आवश्यक है। इसी आधार पर पीठ ने मामले को संबंधित अधिकार क्षेत्र वाली पीठ के समक्ष रखने का निर्देश दिया।
मुख्य सचिव की ओर से माफी की पेशकश
पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत को बताया कि मुख्य सचिव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) की खामियां दूर करने के संबंध में कोई गलत बयान देने की जानबूझकर मंशा नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अदालत चाहे तो मुख्य सचिव बिना शर्त माफी मांगने के लिए तैयार हैं।
हालांकि, आवेदकों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कौशल और चेतन मित्तल ने इस मामले को अवमानना संबंधी पीठ के समक्ष भेजने के सुझाव का विरोध नहीं, बल्कि राज्य सरकार के आचरण पर गंभीर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सरकार का रवैया अवमाननापूर्ण है और अदालत की कार्यवाही की गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में अपील की खामियों पर विवाद
पीठ ने याद दिलाया कि तीन अगस्त को उसने अपील का निपटारा करते हुए मुख्य सचिव को अनुपालन हलफनामा दाखिल करने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया था। निर्धारित समय पर हलफनामा दाखिल नहीं होने के बाद अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग करते हुए आवेदन दायर किए गए।
इसके बाद राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि उसने एक सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर दी है। हाई कोर्ट ने राज्य को अपनी अपील पर सुनवाई का अवसर दिलाने के लिए कई बार सुनवाई स्थगित की।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से प्राप्त रिपोर्ट में सामने आया कि पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की अपीलों में खामियां अब भी बरकरार थीं। इसके विपरीत, मुख्य सचिव पहले हलफनामे में दावा कर चुके थे कि इन खामियों को दूर कर दिया गया है। इसी दावे पर आवेदकों ने सवाल उठाए थे।