लक्की मेहता |लुधियाना
समर न्यूज
दूध बेचकर मोटी कमाई करने का सपना देखने वाले डेयरी किसानों की हकीकत चौंकाने वाली है। 100 गाय-भैंसों को पालने, दिन-रात उनकी देखभाल करने और दूध बेचने के बाद भी अगर रोजाना महज 310 रुपये बचें, तो इस कारोबार में किसान आखिर कमाएगा क्या और परिवार का खर्च कैसे चलाएगा?
हैबोवाल डेयरी के प्रधान कुलदीप सिंह लाहौरिया ने डेयरी कारोबार का यह हिसाब सामने रखते हुए किसानों की आर्थिक बदहाली बयां की है। उनका कहना है कि तूड़ी की किल्लत, पशु आहार में महंगाई, हरे चारे की बढ़ती खपत और मजदूरों की कमी ने डेयरी संचालकों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
लाहौरिया के मुताबिक, 100 गाय-भैंसों के मिश्रित डेयरी फार्म से बेहतर खुराक देने के बावजूद रोजाना औसतन 550 किलो दूध मिलता है। दूध की औसत फैट 6.0 और 10.70 रुपये प्रति फैट के हिसाब से रोजाना कुल आमदनी करीब 35,310 रुपये बनती है। दूसरी तरफ, पशुओं की खुराक, मजदूरी, दवाइयों, डॉक्टर और दूसरे जरूरी खर्चों पर रोजाना करीब 35,000 रुपये खर्च हो जाते हैं। यानी पूरे दिन की मेहनत के बाद सिर्फ 310 रुपये बचते हैं। कुलदीप सिंह लाहौरिया ने बताया कि डेयरी चलाने का खर्च लगातार बढ़ रहा है। पहले जिस तूड़ी पर रोजाना करीब 3,000 रुपये खर्च होते थे, अब उसके लिए 5,000 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। उनके मुताबिक, मिलों में तूड़ी की मांग बढ़ने के कारण बाजार में इसकी किल्लत हो रही है।
मिलों के लिए तूड़ी कोयले के मुकाबले सस्ता विकल्प पड़ता है, इसलिए डेयरी संचालकों को पर्याप्त तूड़ी मिलने में परेशानी हो रही है। सरकार से मांग की कि डेयरी किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए मिलों में तूड़ी जाने पर रोक लगाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।