धर्मशाला में डीडीयू-जीकेवाई 2.0 की क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित, पंचायत भवनों के बजट में बढ़ोतरी; मंत्री
अनिरुद्ध सिंह बोले—जमीन की औपचारिकताएं पूरी करें, धन की कमी नहीं होगी
Summer express/राहुल चावला, धर्मशाला: 2हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण विकास को गति देने, युवाओं को रोजगार से जोड़ने और पंचायतों के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए सरकार की ओर से कई कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश की करीब 300 ग्राम पंचायतों में आधुनिक पंचायत भवनों का निर्माण किया जा चुका है या निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। वहीं, दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले लगभग 78 प्रतिशत युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाने में सफलता मिली है। यह जानकारी पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने शुक्रवार को धर्मशाला में आयोजित डीडीयू-जीकेवाई 2.0 की क्षेत्रीय कार्यशाला के दौरान दी।
कार्यशाला में उत्तराखंड समेत आसपास के राज्यों के प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास, रोजगार के अवसर बढ़ाने, पंचायतों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सरकारी सेवाओं को डिजिटल माध्यम से लोगों तक पहुंचाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रही है, ताकि लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जोड़ने पर जोर
मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि डीडीयू-जीकेवाई केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित योजना है। इसके अंतर्गत ग्रामीण युवाओं को ब्यूटी एंड वेलनेस, पर्यटन समेत विभिन्न क्षेत्रों में रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए प्रयास किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों के चलते हिमाचल योजना के क्रियान्वयन में देश के अग्रणी पांच राज्यों में शामिल है। सरकार का उद्देश्य युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध करवाना है। इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल सकती है।
पंचायत भवन निर्माण का बजट 33 लाख से बढ़ाकर 1.14 करोड़
ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने पंचायत भवनों के निर्माण हेतु निर्धारित राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि पहले एक पंचायत भवन के निर्माण के लिए करीब 33 लाख रुपये का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर अब लगभग 1 करोड़ 14 लाख रुपये कर दिया गया है। इससे पंचायतों में आधुनिक सुविधाओं से युक्त भवन तैयार करने में सहायता मिल रही है।मंत्री के अनुसार, प्रदेश में करीब 300 ग्राम पंचायतों में नए पंचायत भवनों का निर्माण हो चुका है या इनसे संबंधित कार्य आगे बढ़ाए गए हैं। इन भवनों को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है, ताकि पंचायत स्तर पर लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और सरकारी कामकाज सुचारू रूप से संचालित हो।
भवनों के लिए 10 बिस्वा जमीन का मानक तय
पंचायत भवनों के निर्माण में जमीन की उपलब्धता को महत्वपूर्ण बताते हुए मंत्री ने कहा कि पहले भूमि का कोई निर्धारित मानक नहीं था। कई जगह दो या तीन बिस्वा जमीन पर ही भवन बनाने की व्यवस्था की जाती थी। इससे निर्माण कार्यों और भवनों की उपयोगिता को लेकर समस्याएं सामने आती थीं।अब सरकार ने पंचायत भवन के लिए न्यूनतम 10 बिस्वा जमीन का मानक निर्धारित किया है। भवनों के नक्शे लोक निर्माण विभाग से तैयार करवाए गए हैं। साथ ही, इनके डिजाइन और रंग को भी एक समान रखा गया है, ताकि प्रदेश में पंचायत भवनों की अलग पहचान बन सके।
अधूरे भवनों के लिए जमीन संबंधी प्रक्रिया पूरी करना जरूरी
कांगड़ा जिले और विशेष रूप से सुलह विधानसभा क्षेत्र में पिछले तीन से चार वर्षों से लंबित पंचायत भवनों के निर्माण का मामला उठने पर अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि कुछ मामलों में भूमि से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी नहीं हुई होंगी। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे जमीन संबंधी प्रक्रियाओं को जल्द पूरा करवाएं, ताकि निर्माण कार्यों में तेजी लाई जा सके।उन्होंने बताया कि वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) से संबंधित प्रक्रिया भी अब एक-एक महीने के भीतर पूरी हो रही है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि भूमि संबंधी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद पंचायत भवनों के निर्माण के लिए बजट की कोई कमी नहीं है। सरकार की ओर से धन उपलब्ध करवाने में बाधा नहीं आएगी।
पंचायतों की सेवाएं ऑनलाइन, घर बैठे मिलेंगे प्रमाण पत्र
डिजिटल सुविधाओं के विस्तार पर मंत्री ने कहा कि प्रदेश की पंचायतों में इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध है और अधिकतर पंचायतों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा भी स्थापित की गई है। पंचायतों की कई सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया गया है। अब लोग घर बैठे परिवार रजिस्टर की प्रति तथा जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जैसी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।उन्होंने कहा कि पंचायत बैठकों की कार्यवाही और प्रस्तावों को लेकर पहले कई तरह की शिकायतें सामने आती थीं। कुछ मामलों में लोगों की गैरमौजूदगी में हस्ताक्षर करने या पिछली तारीख में प्रस्ताव दर्ज करने के आरोप लगते थे। ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए कार्यवाही को ऑनलाइन किया गया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं और आवश्यकतानुसार अपने सॉफ्टवेयर भी तैयार किए हैं।
नए जिले बनाने पर अभी फैसला नहीं
प्रदेश में नए जिले बनाने को लेकर गठित कमेटी और विपक्ष की प्रतिक्रिया पर मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि कमेटी ने भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपनी सिफारिशें दी हैं। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रदेश में नए जिले बनाए जाएंगे या नहीं। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा का काम विरोध करना रह गया है।मंत्री ने कहा कि किसी भी पार्टी या उम्मीदवार को सत्ता में लाने का फैसला जनता करती है। केवल बयानबाजी से कुछ हासिल नहीं होता, बल्कि नेताओं की कथनी और करनी में समानता होनी चाहिए।