Summer express, गुरुग्राम | शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और सड़कों से उड़ने वाली धूल पर अंकुश लगाने के लिए नगर निगम गुरुग्राम ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत सड़क विकास, मशीनों से सफाई, पानी के छिड़काव, निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) कचरे के उचित निस्तारण और खुले में कचरा जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे। निगमायुक्त प्रदीप दहिया की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के निर्धारित लक्ष्यों, लंबित शिकायतों और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ की गई कार्रवाई की समीक्षा की गई।
अधिकारियों के अनुसार, सीएक्यूएम के तहत गुरुग्राम में कुल 396 किलोमीटर सड़कों के विकास का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से 198.74 किलोमीटर सड़कों का काम पूरा हो चुका है। शेष कार्य दिसंबर के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। निगमायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभिन्न माध्यमों से मिलने वाली शिकायतों का समय पर और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए।
प्रमुख सड़कों से धूल हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत नगर निगम के प्रत्येक जोन में ऐसी सड़कों की पहचान की जाएगी, जहां धूल जमा होने की समस्या अधिक है। संबंधित टीमों को प्रतिदिन किए गए कार्यों का ब्योरा देने के साथ काम शुरू होने से पहले और पूरा होने के बाद की तस्वीरें भी प्रस्तुत करनी होंगी। मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों के रात के समय संचालन और उनकी कार्यप्रणाली पर भी निगरानी रखी जाएगी।
सैनिटेशन इंस्पेक्टरों को मशीनों के निर्धारित रूट, काम के समय, सफाई के दायरे और सामने आने वाली समस्याओं की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा, बागवानी और संबंधित विभागों की मदद से पानी के छिड़काव के लिए जोनवार रूट प्लान तैयार किया जाएगा। निगरानी टीमें मौके पर पहुंचकर यह सत्यापित करेंगी कि निर्धारित स्थानों पर पानी का छिड़काव हो रहा है या नहीं। इन उपायों का उद्देश्य सड़क पर जमा धूल को हटाना और वाहनों की आवाजाही के दौरान धूल उड़ने की समस्या को कम करना है।
निर्माण एवं विध्वंस कचरे के प्रबंधन को भी प्रदूषण नियंत्रण अभियान में प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत निर्माण स्थलों, धूल प्रभावित मार्गों और उन स्थानों की पहचान की जाएगी, जहां मलबा अवैध रूप से डाला जाता है। निर्माण स्थलों पर बैरिकेडिंग और डस्ट स्क्रीन लगाने के साथ निर्माण सामग्री को ढककर रखने की व्यवस्था की जांच होगी। सड़कों के किनारे निर्माण सामग्री जमा करने पर रोक लगाने और मलबे के परिवहन में ढके हुए वाहनों का इस्तेमाल सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। नालों और सीवरों की सफाई से निकलने वाली गाद को समय पर उठाकर उचित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी।
नगर निगम के अनुसार, 1 अप्रैल से 17 अक्टूबर तक विभिन्न नियमों के उल्लंघन पर कुल 588 चालान किए गए हैं। इनमें निर्माण एवं विध्वंस कचरे से संबंधित 278 चालान, बिना ढके निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहनों के 173 चालान और धूल नियंत्रण संबंधी निर्देशों का पालन नहीं करने पर 72 चालान शामिल हैं। इसके अलावा, धूल नियंत्रण के लिए लगाए गए जुर्माने के 27, कचरा जलाने के 22 और खुले में कचरा डालने या फेंकने के 15 चालान किए गए। निर्माण कार्य बंद करने के निर्देशों का पालन नहीं करने पर भी एक चालान जारी किया गया। निगम ने नियमों का उल्लंघन करने वालों पर निगरानी बढ़ाने और कार्रवाई को अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया है।
खुले में कचरा और बायोमास जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था भी बनाई जाएगी। सूचना मिलने पर संबंधित टीमों को मौके पर पहुंचकर सुरक्षित तरीके से आग बुझाने और बचे हुए कचरे को हटाने के निर्देश दिए जाएंगे। इसके साथ ही घटना स्थल की जानकारी, तस्वीरें और जिम्मेदार व्यक्ति या एजेंसी का विवरण दर्ज किया जाएगा, ताकि नियमानुसार कार्रवाई की जा सके। जिन स्थानों पर बार-बार कचरा जलाने की घटनाएं सामने आती हैं, वहां विशेष निगरानी रखी जाएगी और सैनिटेशन सिक्योरिटी फोर्स (एसएसएफ) की तैनाती पर भी जोर दिया जाएगा।
प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को प्रभावी बनाने के लिए सफाई कर्मचारियों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), घर-घर से कचरा एकत्र करने वाली एजेंसियों और सड़क सफाई एजेंसियों को जागरूक किया जाएगा। इसके लिए प्रशिक्षण और सूचना, शिक्षा एवं संचार से जुड़ी गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कार्यों की प्रगति पर नजर रखने के लिए समयबद्ध रिपोर्टिंग व्यवस्था लागू करने की योजना है। इसके तहत प्राथमिकता वाली सड़कों और प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने तथा पानी के छिड़काव के रूट तय करने का काम एक दिन के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। तीन दिनों के भीतर कनिष्ठ अभियंताओं को वार्डवार निर्माण स्थलों और प्रदूषण प्रभावित स्थानों की प्रारंभिक सूची तैयार करनी होगी। साथ ही, 396 किलोमीटर के सड़क विकास लक्ष्य के तहत प्रत्येक सड़क पर हुए कार्य की स्थिति की जांच की जाएगी।
फील्ड टीमों और कनिष्ठ अभियंताओं को प्रतिदिन शाम पांच बजे तक निरीक्षण किए गए स्थलों, नियमों के उल्लंघन, जारी चालानों और कचरा जलाने की घटनाओं की रिपोर्ट देनी होगी। कार्यों की पुष्टि के लिए जियोटैग की गई पहले और बाद की तस्वीरें भी रिकॉर्ड में रखी जाएंगी। लंबित मामलों और बार-बार नियम तोड़ने वाले व्यक्तियों या एजेंसियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा भी तैयार किया जाएगा। अगली समीक्षा बैठक में निर्धारित लक्ष्यों और समयसीमा के मुकाबले प्रगति की जांच की जाएगी। विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय से जुड़े लंबित मामलों को उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाने की भी योजना है।
निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए सड़क विकास, धूल हटाने, निर्माण स्थलों पर धूल रोकने, सीएंडडी कचरे के उचित निस्तारण और खुले में कचरा जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने जैसे कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने और सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया। नगर निगम का लक्ष्य नियमित निरीक्षण, फोटो आधारित रिपोर्टिंग और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण संबंधी कार्यों में तेजी लाना है।