किसानों की उपज खरीदने के लिए बेहतर बाजार व्यवस्था बनाने की मांग
Summer express/बिलासपुर, सुभाष-: हिमाचल प्रदेश में किसानों का रुझान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ नकदी फसलों की ओर भी बढ़ रहा है। इसी कड़ी में हल्दी की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का अच्छा जरिया बन सकती है। बिलासपुर जिले के करोट गांव के प्रगतिशील किसान श्यामलाल ठाकुर भी हल्दी की खेती से बेहतर कमाई की उम्मीद लगाए हुए हैं।श्यामलाल ठाकुर ने इस वर्ष करीब 6 क्विंटल हल्दी का बीज लगाया है। उन्हें इस सीजन में 35 से 40 क्विंटल तक उत्पादन होने की संभावना है। किसान पिछले कई वर्षों से हल्दी की खेती कर रहे हैं और उन्हें बीते वर्ष भी अच्छी पैदावार मिली थी। इस बार भी बेहतर उत्पादन के साथ अच्छी आमदनी मिलने की उम्मीद है।
श्यामलाल ठाकुर का कहना है कि हल्दी का इस्तेमाल केवल रसोई में मसाले के रूप में ही नहीं, बल्कि औषधीय उत्पादों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में भी होता है। ऐसे में इस फसल की बाजार में अच्छी संभावनाएं हैं। यदि किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मिले और खरीद की पर्याप्त व्यवस्था हो, तो हल्दी की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकती है।उन्होंने सरकार की ओर से हल्दी का मूल्य 150 रुपये निर्धारित किए जाने पर आभार जताया। उनके अनुसार, सरकार के इस कदम से हल्दी उत्पादक किसानों को प्रोत्साहन मिला है। हालांकि, केवल मूल्य निर्धारित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों की उपज खरीदने के लिए भी ठोस व्यवस्था जरूरी है।श्यामलाल ठाकुर ने मांग की कि हल्दी की खरीद के लिए अच्छे व्यापारियों को आगे लाया जाए और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध करवाया जाए। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी नहीं होगी और उन्हें मेहनत का उचित लाभ मिल सकेगा।