Summer express, राखीगढ़ी। हरियाणा के ऐतिहासिक स्थल राखीगढ़ी में खुदाई के दौरान मिले पुरातात्विक अवशेष लंबे समय से देश-विदेश के शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण और अध्ययन का विषय रहे हैं। इन दिनों आयोजित महोत्सव में प्रदर्शनी में रखा करीब 7,000 साल पुराना मिट्टी का गोलाकार झुनझुना लोगों का ध्यान खींच रहा है। सामान्य गेंद जैसी आकृति वाले इस खिलौने पर कई छोटे-छोटे छेद बने हैं। इसकी सबसे खास बात यह है कि पूरी बनावट में कहीं भी कोई जोड़ दिखाई नहीं देता। इसकी निर्माण तकनीक और भीतर से आने वाली छन-छन की आवाज ने विशेषज्ञों की जिज्ञासा बढ़ा दी है।
राखीगढ़ी में मौजूद नौ टीलों में से सात पर फिलहाल खुदाई का काम चल रहा है। खुदाई के दौरान यहां मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े, मूर्तियां, पशुओं की आकृति वाले खिलौने, ईंटें और धातु के औजार सहित कई पुरातात्विक अवशेष मिले हैं। शोधकर्ता इन वस्तुओं की बनावट, निर्माण प्रक्रिया और उन पर उकेरी गई कलाकृतियों का गहराई से अध्ययन कर रहे हैं। इसी क्रम में प्राचीन मिट्टी के झुनझुने को लेकर भी शोध किया जा रहा है।
विशेषज्ञ यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि इस झुनझुने को बिना किसी जोड़ के किस तरह तैयार किया गया। इसे हिलाने पर छन-छन की आवाज आती है, लेकिन इसके भीतर मौजूद सामग्री का अब तक पता नहीं चल पाया है। झुनझुने में बने छेद इतने छोटे हैं कि उनके जरिए अंदर कोई सामग्री डाले जाने की प्रक्रिया समझना मुश्किल है। ऐसे में इसकी निर्माण तकनीक और आवाज पैदा होने का तरीका शोध का अहम विषय बना हुआ है।
इतिहास के शिक्षक बलजीत सिसाय के अनुसार, इस कलाकृति का डिजाइन हैरान करने वाला है। करीब सात हजार साल पुरानी यह वस्तु सुरक्षित अवस्था में मिली है। इसकी बनावट प्राचीन काल में मौजूद तकनीकी दक्षता की ओर संकेत करती है। हालांकि, झुनझुने के भीतर मिट्टी, बजरी या धातु की छोटी गोलियां हैं या कोई अन्य सामग्री, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। इसकी बनावट और मजबूती को देखते हुए इसके निर्माण में इस्तेमाल की गई तकनीक को समझना महत्वपूर्ण है।
इतिहासकार डॉ. महेंद्र सिंह का कहना है कि यह कलाकृति हजारों साल पुरानी शिल्पकला का उदाहरण है और इसके बारे में विस्तृत शोध की जरूरत है। उनके अनुसार, प्राचीन समय में भी बच्चों के खेलने के लिए इस तरह के झुनझुने बनाए जाते थे। उस दौर में धातु की उपलब्धता सीमित होने या आम लोगों की पहुंच से बाहर होने के कारण मिट्टी से बर्तन, मूर्तियां और आभूषण बनाने की परंपरा अधिक प्रचलित रही होगी।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. मनोज सक्सेना के अनुसार, राखीगढ़ी की खुदाई में मिट्टी के बर्तनों, गहनों और मूर्तियों सहित अनेक पुरावशेष मिले हैं। इन अवशेषों पर अलग-अलग स्तरों पर शोध किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मिट्टी के झुनझुने का डिजाइन अनूठा है और इसकी बनावट लोगों को आकर्षित करती है। शोधकर्ता इसकी संरचना, निर्माण प्रक्रिया और तकनीकी पहलुओं का अध्ययन कर रहे हैं, ताकि इस प्राचीन कलाकृति से जुड़े रहस्यों को समझा जा सके।