Summer express, राकेश कुमार शर्मा, करनाल। एक हादसे ने उनका पैर छीन लिया, लेकिन आगे बढ़ने का हौसला नहीं छीन सका। मुश्किल परिस्थितियों को चुनौती देते हुए करनाल के नितेश कुमार ने अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है। पैरा एशियन गेम्स में बैडमिंटन की एसएल-3 श्रेणी के पुरुष एकल मुकाबले में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने देश का नाम रोशन किया। फाइनल में नितेश ने भारत के ही दिग्गज खिलाड़ी प्रमोद भगत को 21-16 से हराया। इसके अलावा उन्होंने मिश्रित युगल वर्ग में रजत पदक भी अपने नाम किया। नितेश की इस उपलब्धि से उनके परिवार और करनाल में खुशी का माहौल है।
नितेश कुमार की सफलता के पीछे संघर्ष, धैर्य और दृढ़ इच्छाशक्ति की कहानी है। आईआईटी मंडी में पढ़ाई के दौरान वह फुटबॉल खेलते थे और खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखते थे। वर्ष 2014 में हुए एक हादसे ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। दुर्घटना में उनका पैर बुरी तरह चोटिल हो गया, जिसके बाद उन्हें शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इस मुश्किल दौर में नितेश ने हार मानने के बजाय खुद को संभाला और नई शुरुआत करने का फैसला किया। उन्होंने बैडमिंटन को अपना लक्ष्य बनाया और लगातार मेहनत के दम पर आगे बढ़ते रहे।
नितेश ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर सफलता की सीढ़ियां चढ़ीं। वर्ष 2016 में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने अपनी क्षमता साबित की। इसके बाद वर्ष 2017 में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल कर उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। नियमित अभ्यास, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण ने उन्हें एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया। अब पैरा एशियन गेम्स में स्वर्ण और रजत पदक जीतकर उन्होंने अपनी उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है।
नितेश कुमार की पहचान केवल एक पदक विजेता खिलाड़ी तक सीमित नहीं है। वर्ष 2019 में उनका चयन खेल विभाग में हुआ था। वर्तमान में वह करनाल के कर्ण स्टेडियम में बैडमिंटन कोच के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही वह हैदराबाद में प्रशिक्षण भी लेते हैं। अपनी खेल उपलब्धियों के साथ वह नई प्रतिभाओं को तैयार करने में भी योगदान दे रहे हैं। उनकी यात्रा बताती है कि शारीरिक चुनौतियां किसी व्यक्ति के सपनों और क्षमताओं की सीमा तय नहीं करतीं।
नितेश की सफलता से उनके पिता विजेंद्र सिंह बेहद खुश हैं। उनके लिए यह उपलब्धि वर्षों के संघर्ष, मेहनत और विश्वास का परिणाम है। हादसे के बाद बेटे ने जिस तरह मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया और खेल के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई, वह पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय है। नितेश की जीत ने परिवार को भावुक कर दिया है।
नितेश की मां प्रेम कौर भी बेटे की कामयाबी से बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि नितेश ने हर चुनौती का मजबूती से सामना किया और परिवार ने हमेशा उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। वहीं, बहन निशा सिंह के लिए भी भाई की यह उपलब्धि गर्व का क्षण है। नितेश की सफलता परिवार के साथ-साथ पूरे करनाल के लिए गौरव की बात है।
नितेश कुमार की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ने के बारे में सोचते हैं। उन्होंने अपने संघर्ष को सफलता में बदलते हुए दिखाया है कि मजबूत इच्छाशक्ति, निरंतर मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण से मुश्किलों के बावजूद आगे बढ़ा जा सकता है। पैरा एशियन गेम्स में उनके स्वर्ण और रजत पदक उनकी इसी लगन और हौसले का प्रमाण हैं।