Summer express/ शिमला-: आंगनवाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन, संबंधित सीटू, शिमला जिला कमेटी ने प्रदेश सरकार की ओर से मानदेय वृद्धि को 1 नवंबर 2026 से लागू करने के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है। यूनियन ने मांग की है कि बजट सत्र 2026-27 में घोषित 1,000 रुपये की मानदेय वृद्धि अप्रैल 2026 से लागू की जाए और अप्रैल से अक्टूबर तक का पूरा एरियर जारी किया जाए। इस मांग को लेकर यूनियन ने 22 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना में संशोधन करने की मांग उठाई है।
यूनियन की जिला कमेटी की बैठक में प्रदेश सरकार के फैसले को आंगनवाड़ी कर्मियों के साथ अन्याय करार दिया गया। बैठक में 1 से 3 दिसंबर तक आयोजित होने वाले सीटू के दिल्ली घेराव कार्यक्रम की तैयारियों पर भी चर्चा की गई। यूनियन के अनुसार, इस कार्यक्रम में शिमला जिले से 100 आंगनवाड़ी कर्मी भाग लेंगी।बैठक को संबोधित करते हुए यूनियन नेताओं मीना मेहता, हरदेई ठाकुर और ऊषा देवी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने बजट में आंगनवाड़ी कर्मियों के मानदेय में 1,000 रुपये की वृद्धि की घोषणा की थी, लेकिन अब इसका लाभ 1 नवंबर 2026 से देने का फैसला किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मानदेय वृद्धि की घोषणा अप्रैल 2026 से किए जाने के संदर्भ में की गई थी, तो अप्रैल से अक्टूबर तक के बकाया भुगतान को अधिसूचना में शामिल क्यों नहीं किया गया।उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से 22 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मासिक मानदेय 10,500 रुपये से बढ़ाकर 11,500 रुपये और सहायिकाओं का मानदेय 5,800 रुपये से बढ़ाकर 6,800 रुपये किया गया है। हालांकि, इस वृद्धि को नवंबर से लागू करने के फैसले ने कर्मियों को निराश किया है। यूनियन ने सरकार से पूछा कि अप्रैल से मानदेय वृद्धि का लाभ देने में क्या परेशानी है और सात महीने के बकाया भुगतान पर सरकार की क्या स्थिति है।
यूनियन नेताओं ने कहा कि प्रदेश की हजारों आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं बच्चों के पोषण, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा मातृ-शिशु कल्याण से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं। इसके बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय पर काम करना पड़ रहा है। महंगाई के मौजूदा दौर में मानदेय वृद्धि का लाभ निर्धारित अवधि से बाद में देना उनके आर्थिक हितों के साथ अन्याय है।
उन्होंने कहा कि सरकार को केवल अधिसूचना जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बजट में की गई घोषणा को पूरी तरह लागू करना चाहिए। आंगनवाड़ी कर्मियों को आश्वासनों के बजाय बढ़े हुए मानदेय और बकाया एरियर का भुगतान चाहिए। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि अप्रैल से अक्टूबर 2026 तक की अवधि के भुगतान को नजरअंदाज करने का क्या कारण है।
यूनियन ने बताया कि 23 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों के प्रत्येक प्रोजेक्ट में आंगनवाड़ी कर्मियों ने प्रदर्शन कर सरकार के फैसले के प्रति अपना विरोध दर्ज करवाया। इन प्रदर्शनों के माध्यम से सरकार से मानदेय वृद्धि की प्रभावी तिथि अप्रैल 2026 निर्धारित करने और बकाया राशि जारी करने की मांग उठाई गई।
बैठक में मांग की गई कि 22 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना में संशोधन कर मानदेय वृद्धि अप्रैल 2026 से लागू की जाए। अप्रैल से 31 अक्टूबर 2026 तक का पूरा एरियर जारी करने के साथ भुगतान की समय सीमा तय की जाए, ताकि कर्मियों को उनका बकाया जल्द मिल सके।यूनियन नेताओं ने प्रदेश सरकार को चेतावनी दी कि यदि अधिसूचना में संशोधन कर अप्रैल से एरियर सहित मानदेय वृद्धि लागू नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कर्मियों को उनका आर्थिक अधिकार देना सरकार की जिम्मेदारी है, कोई एहसान नहीं।बैठक में सीटू के राज्य उपाध्यक्ष अजय दुलटा, जिला महासचिव अमित कुमार, जिला कोषाध्यक्ष बालक राम सहित अन्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं उपस्थित रहीं।