Summer express, गुरुग्राम। शहर में लावारिस शवों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार कराने की व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। नगर निगम और मदनपुरी स्थित रामबाग श्मशान प्रबंधन कमेटी के बीच हुआ समझौता 21 अक्टूबर को समाप्त हो गया, लेकिन कमेटी ने इसे आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। पांच दिन बीतने के बावजूद नगर निगम की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी है। ऐसे में लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराने में पुलिसकर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में मिलने वाले लावारिस शवों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। इसके लिए निगम हर साल मदनपुरी स्थित रामबाग श्मशान प्रबंधन कमेटी को ठेका देता रहा है। वर्षों से यह काम कमेटी के माध्यम से किया जा रहा है। पहले इसकी देखरेख राजू गुप्ता करते थे। श्मशान की दीवार गिरने के बाद दोबारा समझौता होने पर उनके बेटे पारस गुप्ता ने इसकी जिम्मेदारी संभाली थी।
श्मशान प्रबंधन कमेटी के अनुसार, समझौते का नवीनीकरण वर्ष 2025 की शुरुआत में किया गया था। इसके बाद मार्च 2026 में इसे छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया। यह अवधि 21 अक्टूबर को समाप्त हो गई। समझौता खत्म होने से पहले नगर निगम ने कमेटी से इसे दोबारा नवीनीकृत करने का आग्रह किया था, लेकिन कमेटी ने आगे काम करने से मना कर दिया।
कमेटी के इस फैसले के पीछे दिल्ली के युवक युवराज मनचंदा की हत्या का मामला भी एक प्रमुख वजह माना जा रहा है। इस मामले की जांच के दौरान दिल्ली पुलिस की टीम पूछताछ के लिए रामबाग श्मशान पहुंची थी। बताया जा रहा है कि पूछताछ के बाद वहां काम करने वाले दो कर्मचारी डर के कारण नौकरी छोड़कर चले गए। युवराज मनचंदा के शव की पहचान नहीं हो पाई थी और उसका अंतिम संस्कार लावारिस शव के रूप में किया गया था।
कमेटी का कहना है कि वह सेवा भावना से लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करती रही है, लेकिन ऐसे मामलों में पुलिस की पूछताछ और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण कर्मचारियों में डर का माहौल बन गया है। इसी वजह से कमेटी अब इस जिम्मेदारी को आगे जारी रखने के पक्ष में नहीं है।
व्यवस्था में आ रही इस बाधा का असर पुलिस के कामकाज पर भी पड़ रहा है। पिछले सप्ताह सेक्टर-14 में एक लावारिस शव मिलने के बाद जांच अधिकारी अशोक कुमार को अंतिम संस्कार कराने के लिए श्मशान के कई चक्कर लगाने पड़े। शुरुआत में श्मशान प्रबंधन ने समझौता समाप्त होने का हवाला देते हुए शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। बाद में काफी समझाने और नगर निगम के अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद अंतिम संस्कार हो सका।
रामबाग भूमि सुधार समिति के महासचिव केके बांब का कहना है कि श्मशान प्रबंधन कमेटी सेवा भाव से यह काम करती रही है। नया समझौता होने तक मानवीय आधार पर शवों के अंतिम संस्कार से इनकार नहीं किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने नगर निगम से मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द नया समझौता करने या वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि पुलिस और आम लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।