Summer express, गुरुग्राम। दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर स्थित हीरो होंडा चौक फ्लाईओवर की खराब हालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2017 में उद्घाटन के समय वाहन चालकों को सुगम सफर की उम्मीद देने वाला यह फ्लाईओवर कुछ ही वर्षों में बार-बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। अब स्थिति यह है कि फ्लाईओवर के स्लैब से कंक्रीट टूटकर गिर रहा है और अंदर लगे सरिये बाहर दिखाई देने लगे हैं। व्यस्त हाईवे पर फ्लाईओवर की यह हालत वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन गई है।
जयपुर से दिल्ली की ओर जाने वाली फ्लाईओवर की एक लेन करीब दो साल से बंद पड़ी है। इस दौरान सड़क पर बने गड्ढों की समस्या भी बढ़ती गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाया। अब स्लैब का कंक्रीट उखड़ने और सरिये उजागर होने से इसकी संरचनात्मक स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली-जयपुर हाईवे का हिस्सा होने के कारण इस मार्ग पर रोजाना बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। ऐसे में फ्लाईओवर की मरम्मत में देरी से यात्रियों को परेशानी के साथ हादसे का खतरा भी बना हुआ है।
हीरो होंडा चौक फ्लाईओवर के क्षतिग्रस्त होने की समस्या नई नहीं है। अप्रैल 2018 में उद्घाटन के एक साल के भीतर ही सड़क का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया था। मई 2019 में इसी हिस्से में दोबारा कंक्रीट गिरने से बड़ा सुराख बन गया। इसके बाद सरकार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई की टीम से फ्लाईओवर का ऑडिट कराया था। हालांकि, ऑडिट के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। वर्ष 2022 में जयपुर से दिल्ली की ओर एक्सप्रेसवे की लेन का करीब 20 मीटर हिस्सा नीचे की तरफ धंस गया था और सरिये बाहर दिखाई देने लगे थे। इसके बाद भी फ्लाईओवर की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
फ्लाईओवर की बदहाली का मुद्दा लगातार उठाने वाले आरटीआई कार्यकर्ता रमेश यादव ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय नहीं होगी और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक व्यवस्था में सुधार की उम्मीद कम है। उन्होंने कहा कि फ्लाईओवर की खराब हालत के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
एक लेन बंद होने के कारण दूसरी लेन पर वाहनों का दबाव बढ़ गया है। इससे व्यस्त समय में जाम की स्थिति बनने के साथ वाहनों के आपस में टकराने का खतरा भी बढ़ रहा है। फ्लाईओवर के स्लैब से कंक्रीट गिरने की समस्या ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मरम्मत का काम कब शुरू होगा और फ्लाईओवर को सुरक्षित बनाने के लिए स्थायी उपाय कब किए जाएंगे।
इस मामले में एनएचएआई के परियोजना निदेशक भवनेश कुमार ने बताया कि कंसल्टेंट के माध्यम से फ्लाईओवर की मरम्मत के उचित तरीके के बारे में जानकारी ली जा रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद उसके आधार पर मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा।