खेल प्रतिभाओं को मिलेगा बढ़ावा, ओलंपिक-पैरालंपिक पदक विजेताओं को 5 करोड़ तक की पुरस्कार राशि
Summer express/राहुल चावला, धर्मशाला-: जिला कांगड़ा के मुख्यालय धर्मशाला में आयोजित प्रदेश स्तरीय खेल प्रतियोगिता में प्रदेशभर से पहुंचे खिलाड़ियों का स्वागत किया गया। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा के उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने खेलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खेल शारीरिक और मानसिक विकास के साथ-साथ अनुशासन, आपसी भाईचारे और खेल भावना को मजबूत करने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को बेहतर अवसर और सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। केवल सिंह पठानिया ने प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा दिखाने वाले खिलाड़ियों को उचित मंच मिलना आवश्यक है। खेलों के माध्यम से युवा अपनी प्रतिभा को निखारकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल प्रदेश का नाम रोशन कर सकते हैं।
ओलंपिक और पैरालंपिक पदक विजेताओं के लिए बढ़ाई पुरस्कार राशि
पठानिया ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने ओलंपिक और पैरालंपिक में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों की पुरस्कार राशि में बढ़ोतरी की है। उन्होंने बताया कि ओलंपिक और पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए पांच करोड़ रुपये, रजत पदक विजेताओं के लिए तीन करोड़ रुपये और कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए दो करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रोत्साहन से खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा और वे बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होंगे। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और मजबूत खेल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। स्कूलों, पंचायतों और उपमंडल स्तर पर खेल सुविधाओं को सुदृढ़ करने से ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को भी आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
युवाओं को नशे से दूर रखने में खेलों की अहम भूमिका
केवल सिंह पठानिया ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में खेलों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। यदि बच्चों और युवाओं को बेहतर खेल मैदान, आधुनिक सुविधाएं और नियमित अभ्यास के अवसर उपलब्ध करवाए जाएं, तो उन्हें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।उन्होंने प्रतियोगिता के सफल आयोजन में योगदान देने वाले आयोजकों, कोच और शारीरिक शिक्षा अध्यापकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि खेलों को प्रोत्साहित करना केवल खिलाड़ियों के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ समाज और राष्ट्र निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।