हीरो मोटोकॉर्प में साइकिल निर्माण की प्रक्रिया समझी, मुंजाल बर्मिंघम सिटी यूनिवर्सिटी के इनोवेशन सेंटर में फैकल्टी से की बातचीत, वेरका मिल्क प्लांट का भी किया दौरा
लुधियाना, ‘भारत का मैनचेस्टर’ कहे जाने वाले लुधियाना की औद्योगिक ताकत और तकनीकी विकास को करीब से जानने के लिए गुजरात के 48 विद्यार्थियों ने सोमवार को शहर के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों का दौरा किया। शिक्षा मंत्रालय की ‘युवा संगम’ पहल के सातवें चरण के तहत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर), मोहाली की मेजबानी में आए विद्यार्थियों को इस दौरान साइकिल निर्माण, उद्यमिता और डेयरी उद्योग की कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिला।
विद्यार्थियों ने सबसे पहले हीरो मोटोकॉर्प के प्लांट का दौरा किया, जहां उन्होंने साइकिल निर्माण की विभिन्न प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने साइकिल के फ्रेम की पेंटिंग से लेकर अलग-अलग पुर्जों को जोड़ने और अंतिम असेंबली तक की प्रक्रिया को समझा। इस दौरान विद्यार्थियों को यह जानने का अवसर मिला कि किस तरह उत्पादन के विभिन्न चरणों में तकनीक, गुणवत्ता और आपसी तालमेल की मदद से एक तैयार उत्पाद सामने आता है।
इसके बाद विद्यार्थियों ने मुंजाल बर्मिंघम सिटी यूनिवर्सिटी सेंटर ऑफ इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप का दौरा किया। यहां उन्होंने फैकल्टी सदस्यों के साथ बातचीत की और उद्यमिता तथा उद्योग से जुड़ी शिक्षा के महत्व को समझा। बातचीत के दौरान विद्यार्थियों को नए विचारों को विकसित करने, उद्यमशील सोच को बढ़ावा देने और शिक्षा, अनुसंधान तथा उद्योग के बीच संबंधों के बारे में जानने का अवसर मिला।
शाम को विद्यार्थियों ने वेरका मिल्क प्लांट का दौरा किया, जहां उन्होंने दूध के प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और वितरण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस दौरे से उन्हें समझने में मदद मिली कि किस तरह तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण और आपूर्ति व्यवस्था के माध्यम से डेयरी उत्पाद उपभोक्ताओं तक पहुंचाए जाते हैं।
युवा संगम के तहत आईआईएसईआर मोहाली को गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के साथ जोड़ा गया है। इस आदान-प्रदान कार्यक्रम के पहले चरण में चंडीगढ़ के 40 विद्यार्थियों ने 9 से 16 अक्टूबर तक गुजरात का दौरा किया था।
आईआईएसईआर मोहाली के निदेशक प्रो. अनिल के. त्रिपाठी ने इससे पहले कहा था कि युवा संगम का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष अनुभवों और आपसी संवाद के माध्यम से भारत की विविधता को समझने का अवसर देकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है।