Summer express, पलवल। जिले में कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे विशेष जांच अभियान में चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। अभियान के तहत अब तक जिन 14 गांवों में घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच की गई है, वहां कैंसर के 122 सक्रिय मरीज सामने आए हैं। इनमें अलावलपुर, अल्लिका, औरंगाबाद, सौंध, बंचारी, बेढ़ा पट्टी, दीघोट, बघोला, भिड़ूकी, बडोली, चांट, धतीर, हसनपुर, जनौली और सराय खटेला शामिल हैं। जिले के अन्य गांवों और शहरी क्षेत्रों में जांच पूरी होने के बाद मरीजों की संख्या में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।
स्वास्थ्य विभाग ने पहले चरण में जिले के 31 गांवों को इस अभियान के लिए चिह्नित किया है। इनमें से 14 गांवों में जांच पूरी हो चुकी है, जबकि शेष गांवों में अभियान जारी है। इस दौरान 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है, ताकि कैंसर के साथ-साथ मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों की पहचान की जा सके। विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले में फिलहाल 365 कैंसर मरीज दर्ज हैं। ऐसे में शुरुआती 14 गांवों में ही 122 सक्रिय मरीजों का सामने आना व्यापक स्तर पर जांच की जरूरत को दर्शाता है।
जिले में दूषित पानी और उससे होने वाले संभावित स्वास्थ्य नुकसान का मुद्दा लंबे समय से उठता रहा है। नहरों और नालों में औद्योगिक अपशिष्ट युक्त पानी छोड़े जाने की शिकायतों के बीच इस अभियान को शुरू किया गया। दैनिक जागरण द्वारा नहरों में दूषित पानी छोड़े जाने के मामले को प्रमुखता से उठाने और ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में भी मुद्दा सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच अभियान शुरू कराया था।
स्थानीय स्तर पर दिल्ली, फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और पलवल की औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट के गुड़गांव कैनाल, आगरा कैनाल और गौंछी ड्रेन में पहुंचने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इसके अलावा, टैंकरों के जरिये रासायनिक कचरा नालों में डाले जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ स्थानों पर पानी में जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) का स्तर निर्धारित चार मिलीग्राम प्रति लीटर के मुकाबले करीब 50 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंचने की बात सामने आई है। यह पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता का विषय है।
भूमिगत जल खारा होने के कारण जिले के कुछ क्षेत्रों में किसानों को सिंचाई के लिए नहरों और अन्य वैकल्पिक जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में दूषित पानी से सिंचाई और उसके संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई जा रही है। हालांकि, कैंसर के मामलों का दूषित पानी से सीधा संबंध स्थापित करने के लिए वैज्ञानिक जांच और विस्तृत अध्ययन जरूरी हैं।
स्वास्थ्य विभाग की स्क्रीनिंग में कैंसर के अलावा अन्य बीमारियों के संभावित मरीज भी मिले हैं। अभियान के दौरान उच्च रक्तचाप के 560 परीक्षण किए गए, जिनमें 90 लोगों में बीमारी के संकेत मिले। मधुमेह के 55 संदिग्ध मरीजों की भी पहचान की गई। इसके अतिरिक्त, नई जांच में मुंह के कैंसर का एक और स्तन कैंसर के पांच संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इन मामलों की आगे जांच और पुष्टि की प्रक्रिया के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
जिला सिविल सर्जन डॉ. सतिंदर वशिष्ठ ने बताया कि जिले में कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारियों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए व्यापक स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया जा रहा है। पहले चरण में 31 गांवों को शामिल किया गया है। जरूरत पड़ने पर दूसरे गांवों में भी जांच कराई जाएगी। अभियान पूरा होने के बाद जिले में इन बीमारियों की स्थिति का अधिक स्पष्ट आकलन किया जा सकेगा।