Summer express, धर्मशाला ,राहुल चावला। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और चंबा जिलों में लोक निर्माण विभाग की मशीनरी और वाहनों के रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने वाला यांत्रिक मंडल धर्मशाला कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। मंडल में कुल 330 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 58 कर्मचारी ही तैनात हैं। इस तरह स्वीकृत पदों के मुकाबले महज 17 से 18 प्रतिशत कर्मचारी उपलब्ध हैं। तकनीकी और फील्ड स्टाफ की कमी के कारण विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहा है और कई महत्वपूर्ण मरम्मत कार्यों के लिए बाहरी ठेकेदारों तथा निजी फर्मों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है।
यांत्रिक मंडल धर्मशाला का कार्यक्षेत्र कांगड़ा और चंबा जिलों में फैला हुआ है। इसमें भरमौर और पांगी-किलाड़ जैसे दुर्गम जनजातीय क्षेत्र भी शामिल हैं। मंडल के अंतर्गत धर्मशाला, पालमपुर, नूरपुर और चंबा में प्रमुख कार्यशालाएं संचालित की जाती हैं। इन कार्यशालाओं में विभागीय मशीनरी और वाहनों की मरम्मत, रखरखाव तथा संचालन से संबंधित काम किए जाते हैं। इसके अलावा स्टील ट्रस ब्रिज, बेली ब्रिज और फुटब्रिज की स्थापना, लॉन्चिंग तथा हटाने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी भी इसी मंडल के पास है। ऐसे में कर्मचारियों की कमी विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
यांत्रिक मंडल धर्मशाला के अधिशासी अभियंता रोहित राज किरण ने बताया कि कर्मचारियों की कमी की समस्या करीब एक दशक से बनी हुई है और समय के साथ स्थिति और खराब हुई है। उन्होंने कहा कि कार्यालय के लिपिकीय कार्य किसी तरह संभाले जा रहे हैं, लेकिन तकनीकी और फील्ड कर्मचारियों की कमी के कारण विभागीय कार्यों को सुचारू रूप से पूरा करना मुश्किल हो रहा है। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों और सरकार के उच्चाधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया है। उन्होंने कहा कि केवल सभी रिक्त पदों को भरना ही नहीं, बल्कि कामकाज को सामान्य रूप से चलाने के लिए न्यूनतम आवश्यक स्टाफ उपलब्ध करवाना भी जरूरी है। इसके बावजूद अब तक अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है।
कर्मचारियों की कमी के साथ-साथ कार्यशालाओं का पुरानी तकनीक पर निर्भर रहना भी विभाग के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। अधिशासी अभियंता के अनुसार, पहले पर्याप्त तकनीकी स्टाफ उपलब्ध होने के कारण कई बड़े मरम्मत कार्य विभाग अपनी कार्यशालाओं में ही कर लेता था। अब कर्मचारियों की कमी के चलते विशेष और बड़े मरम्मत कार्यों के लिए निजी ठेकेदारों तथा फर्मों की मदद लेनी पड़ रही है। समय के साथ मशीनरी और वाहनों की तकनीक में बदलाव आया है, लेकिन कार्यशालाओं को उसी अनुरूप आधुनिक सुविधाओं से लैस नहीं किया जा सका है। कार्यशालाओं के आधुनिकीकरण और आवश्यक सेवाओं के लिए बाहरी एजेंसियों की मदद लेने संबंधी प्रस्ताव भी उच्चाधिकारियों को भेजे गए हैं, लेकिन इस दिशा में अभी तक ठोस प्रगति नहीं हुई है।
विभाग के सामने मशीनरी और वाहनों की उपलब्धता बनाए रखने की चुनौती भी है। रोहित राज किरण के अनुसार, कांगड़ा और चंबा जिलों में वर्तमान में लगभग 271 से 272 कार्यशील मशीनें और वाहन उपलब्ध हैं। वर्ष 2023 में केंद्र और प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत लागू स्क्रैपिंग नीति के अनुसार 15 वर्ष या उससे अधिक पुराने वाहनों और मशीनों को कंडम किया गया था। इस प्रक्रिया में विभाग की 300 से अधिक मशीनें और वाहन बंद हो गए थे, जिससे कार्यों के संचालन पर असर पड़ा।
उन्होंने बताया कि पिछले करीब तीन वर्षों में बंद हुई मशीनरी और वाहनों की कमी को पूरा करने के लिए लगभग 60 प्रतिशत तक प्रतिस्थापन किया जा चुका है। इसके तहत विभाग को नए एक्सकेवेटर-कम-लोडर, टिप्पर और बोलेरो कैंपर जैसे वाहन उपलब्ध करवाए गए हैं। हालांकि, पुरानी मशीनरी के बंद होने से पैदा हुई कमी को पूरी तरह दूर करने के लिए अभी और संसाधनों की जरूरत है।
प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और हरित ऊर्जा के इस्तेमाल पर जोर दिए जाने के बीच यांत्रिक मंडल की कार्यशालाओं को भी आधुनिक बनाने की संभावनाएं हैं। अधिशासी अभियंता ने बताया कि कार्यशालाओं में इलेक्ट्रिक वाहनों के रखरखाव के लिए आवश्यक संयंत्र स्थापित किए जा सकते हैं। इसके साथ ही चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है। इसके लिए आधुनिक उपकरणों और पर्याप्त तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता जरूरी होगी।
रोहित राज किरण ने कहा कि विभाग के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ मशीनरी और वाहनों की जरूरतों को पूरा करना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों की कमी दूर करने और कार्यशालाओं का आधुनिकीकरण करने की भी आवश्यकता है। यदि इन दोनों समस्याओं का समाधान समय रहते किया जाता है, तो विभाग की कार्यक्षमता बढ़ सकती है और निजी एजेंसियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।