Summer express , कैथल, हरियाणा। सेक्टर-13 में डॉ. विनिता अरोड़ा की हत्या और लूटपाट के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए चार दोषियों की फांसी की सजा को 30 साल के कठोर कारावास में बदल दिया है। वहीं, मामले में दोषी ठहराई गई पूर्व नौकरानी पूनम को बरी कर दिया गया है। यह वारदात 9 जनवरी 2023 को हुई थी।
जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज और जस्टिस रविंदर मलिक की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह निर्णय सुनाया। अदालत ने दोषियों की उम्र, सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि, जेल में उनके आचरण तथा सुधार की संभावनाओं पर विचार करते हुए फांसी की सजा के स्थान पर 30 वर्ष के कठोर कारावास को उचित माना।
इस मामले में स्थानीय अदालत ने 15 दिसंबर को विक्रमजीत उर्फ बिट्टू, सुनील कुमार, मनीष कुमार, विक्रम उर्फ विक्की और पूनम को दोषी ठहराया था। इसके बाद 20 दिसंबर को पांचों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी। अब हाईकोर्ट ने चार दोषियों की सजा में बदलाव करते हुए पूर्व नौकरानी को बरी करने का आदेश दिया है।
जानकारी के अनुसार, डॉ. अतुल अरोड़ा की पत्नी डॉ. विनिता अरोड़ा को घर पर केक बनाने का शौक था और वह इसके ऑर्डर भी लेती थीं। इसी काम के बहाने आरोपी घर की ऊपरी मंजिल तक पहुंचे थे। वहां उन्होंने डॉ. विनिता के सास-ससुर को बंधक बना लिया और वारदात को अंजाम दिया।
आरोपियों ने डॉ. अतुल अरोड़ा को भी बंदूक की नोक पर बंधक बना लिया था और उन्हें एक कमरे में बंद करके फरार हो गए थे। जाते समय आरोपी घर से लाखों रुपये के आभूषण भी ले गए थे। मामले में हत्या और लूटपाट की गंभीरता को देखते हुए निचली अदालत ने दोषियों को मृत्युदंड सुनाया था, जिस पर हाईकोर्ट ने अब संशोधित फैसला दिया है।