Summer Express, चंडीगढ़। हरियाणा में दशहरे के बाद खेतों में पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 20 अक्तूबर तक प्रदेश में पराली जलाने के केवल नौ मामले सामने आए थे, लेकिन इसके बाद 21 अक्तूबर से 1 नवंबर के बीच 12 दिनों में 33 नए मामले दर्ज किए गए। रविवार को सात स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि के साथ ही इस सीजन में कुल मामलों की संख्या बढ़कर 42 हो गई है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, रविवार को हांसी और अंबाला में दो-दो मामले सामने आए। अंबाला जिले में अंबाला और साहा क्षेत्र में खेतों में फसल अवशेष जलाए जाने की घटनाएं दर्ज की गईं। इसके अलावा जींद के पीलूखेड़ा, कैथल के पुंडरी और कुरुक्षेत्र के बबैन में एक-एक मामला सामने आया। आंकड़ों के मुताबिक, 28 और 31 अक्तूबर को पराली जलाने की सबसे अधिक घटनाएं दर्ज की गईं। इन दोनों दिनों में छह-छह स्थानों पर आग लगाए जाने की पुष्टि हुई। जिलेवार स्थिति देखें तो पलवल सात मामलों के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर है, जबकि कैथल में अब तक पांच मामले सामने आ चुके हैं।
कैथल जिले के नागल गांव में किसान जितेंद्र सिंह के खेत में फसल अवशेष जलाने की पुष्टि होने के बाद कृषि विभाग ने पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इससे पहले जिले के मटौर गांव में भी पराली जलाने का मामला सामने आया था। विभाग की ओर से घटनाओं की निगरानी की जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
प्रदेश में तीन बार हुई बारिश के कारण धान की कटाई का काम भी प्रभावित हुआ है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक राज्य में कुल 59.87 प्रतिशत धान की कटाई पूरी हो चुकी है। इसमें बासमती धान की कटाई 43.96 प्रतिशत और गैर-बासमती धान की कटाई 66.15 प्रतिशत तक पहुंची है। बारिश के कारण खेतों में नमी और कटाई में देरी से किसानों को फसल समेटने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।