नई दिल्ली | मालेगांव बम धमाके मामले में NIA की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया है, जिनमें साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित भी शामिल थे। कोर्ट के फैसले ने देश की सियासत को गरमा दिया है। एक ओर जहां AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस फैसले को ‘न्याय का मज़ाक’ बताया, वहीं बीजेपी और शिवसेना ने इसे ‘सच्चाई की जीत’ कहा।
ओवैसी का सवाल—6 नमाज़ियों की हत्या किसने की?
असदुद्दीन ओवैसी ने फैसले पर गहरी नाराज़गी जताते हुए कहा कि 2008 के धमाके में 6 नमाज़ी मारे गए थे और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। “क्या इन्हें उनके मज़हब की वजह से निशाना नहीं बनाया गया?” ओवैसी ने NIA पर जानबूझकर कमजोर जांच करने का आरोप लगाते हुए कहा कि दोषियों को छोड़ने की पटकथा पहले ही लिख दी गई थी।
मोदी सरकार पर सीधा हमला
ओवैसी ने केंद्र की मोदी सरकार और महाराष्ट्र की तत्कालीन फडणवीस सरकार से सवाल किया कि क्या वे इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे? उन्होंने 2016 की उस घटना का भी जिक्र किया, जब अभियोजक रोहिणी सालियान ने दावा किया था कि NIA ने उन पर आरोपियों के प्रति नरम रवैया अपनाने का दबाव डाला।
उन्होंने पूछा – “क्या NIA और ATS के अधिकारियों को उनके काम के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा?” साथ ही उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि “एक आरोपी को बीजेपी ने सांसद बना दिया, यह देश कभी नहीं भूलेगा।”
बीजेपी-शिवसेना की प्रतिक्रिया: कांग्रेस की साजिश बेनकाब
बीजेपी नेता केशव प्रसाद मौर्य ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कांग्रेस ने “भगवा आतंकवाद” का झूठा नैरेटिव खड़ा किया था, जिसे अब न्यायपालिका ने खारिज कर दिया है। मौर्य ने कांग्रेस और गांधी परिवार पर हिंदुओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया।
शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने भी फैसले को ‘सच्चाई की जीत’ बताया और कहा कि “कांग्रेस ने हिन्दू आतंकवाद का नाम गढ़कर देश को गुमराह किया।”