7 August, 2025
रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की एक आध्यात्मिक अभिव्यक्ति भी है। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और जीवन में मिठास के लिए शुभ संस्कार करती हैं। इस दौरान तिलक लगाने की परंपरा का विशेष महत्व होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि तिलक लगाने की भी एक वैदिक विधि है, जिसे सही ढंग से करने से इसका पुण्यफल और प्रभाव बढ़ जाता है?
तिलक लगाने की शास्त्रीय विधि
राखी बांधने से पहले बहनें भाई के ललाट पर तिलक करती हैं। शास्त्रों में उल्लेख है कि:
अनामिका उंगली (रिंग फिंगर) से तिलक लगाना चाहिए, क्योंकि यह उंगली सौर ऊर्जा और अध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है।
तिलक लगाने के बाद, अंगूठे से तिलक को थोड़ा ऊपर की ओर उठाना चाहिए, जिससे भाई के जीवन में उन्नति और विकास के संकेत मिलते हैं।
अक्षत और मिठाई का भी है खास महत्व
तिलक के ऊपर अक्षत (साफ धुले हुए बिना टूटे चावल) लगाए जाते हैं, जो शुद्धता और स्थायित्व के प्रतीक माने जाते हैं। बहन तिलक के साथ यह कामना करती है कि उसके भाई का जीवन अक्षुण्ण, सफल और सुरक्षित बना रहे।
इसके बाद, बहन भाई को मिठाई खिलाती है, ताकि उसके जीवन में हमेशा मिठास और प्रेम बना रहे। यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भाई के प्रति बहन के स्नेह और शुभकामनाओं का मधुर प्रतीक है।
उपहार से जुड़ा भाव
राखी बंधवाने के बाद भाई भी बहन को उपहार देते हैं। यह न केवल प्रेम का प्रतीक होता है, बल्कि एक वादा भी कि वह जीवन भर बहन की रक्षा करेगा और उसे मान-सम्मान देगा।
निष्कर्ष:
रक्षाबंधन पर तिलक लगाने की विधि में केवल धार्मिकता नहीं, बल्कि विज्ञान, ऊर्जा और भावनात्मक जुड़ाव भी समाहित होता है। यदि इस परंपरा को पूरी श्रद्धा और विधिपूर्वक निभाया जाए, तो यह भाई-बहन के रिश्ते को और भी सशक्त और मंगलमय बना देता है।