पानीपत | पानीपत जिले के गांव नारा की तस्वीर सरकार के दावों की पोल खोल रही है। यह वही गांव है जो पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार के आवास से महज 5 किलोमीटर और शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के पैतृक गांव कवि से भी मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दो-दो मंत्रियों के नजदीक होने के बावजूद यहां की दुर्दशा चौंकाने वाली है।
गांव में 3 फीट तक गंदा पानी, छात्रों की दुश्वारी
गांव नारा के मुख्य रास्ते पर जगह-जगह 3 फीट तक गंदा पानी भरा हुआ है। इसी रास्ते से सैकड़ों छात्र रोज़ाना सरकारी स्कूल जाते हैं। बच्चे अक्सर फिसलकर गिर जाते हैं, जिससे उनकी यूनिफॉर्म, जूते और किताबें खराब हो जाती हैं। कई बच्चों को चोट भी लग चुकी है। यही नहीं, यह गंदा पानी गांव के ऐतिहासिक दादी सती मंदिर तक पहुंच चुका है।
जोहड़ बना खतरा: सांपों का आतंक
गांव के जोहड़ की सफाई लंबे समय से नहीं हुई, जिससे उसमें जलकुंभी उग आई है। अब यह जगह जहरीले सांपों और अन्य जीव-जंतुओं का अड्डा बन चुकी है। हाल ही में एक छात्र को सांप ने काट लिया, जबकि दूसरे छात्र के ऊपर सांप लिपट गया था। ग्रामीणों ने बताया कि इस जोहड़ से कई बार शव भी बरामद हो चुके हैं।
छात्रों और शिक्षकों की आपबीती
छात्रा परी ने बताया कि गंदे पानी के कारण स्कूल आने-जाने में भारी परेशानी होती है। यूनिफॉर्म और किताबें खराब हो जाती हैं। वहीं, छात्र अक्षर ने कहा कि रोजाना दर्जनों बच्चे इस पानी में गिर जाते हैं, लेकिन वैकल्पिक रास्ता काफी लंबा होने के कारण मजबूरी में इसी रास्ते से जाना पड़ता है।
स्कूल के अध्यापक वीरेंद्र ने बताया कि यह समस्या बार-बार पंचायत और प्रशासन के सामने रखी गई, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। बच्चों की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है।
सरकार के दावों पर सवाल
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने हाल ही में दावा किया था कि सरकारी स्कूल किसी भी निजी स्कूल से कम नहीं हैं। लेकिन नारा गांव का हाल सरकार के दावों को कटघरे में खड़ा करता है।
ग्रामीणों को मिले सिर्फ आश्वासन
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पंचायत मंत्री से कई बार सफाई और रास्ते की मरम्मत की मांग की, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। ठोस कदम आज तक नहीं उठाए गए।