इस्लामाबाद | पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान अपनी परमाणु क्षमता सऊदी अरब को भी उपलब्ध करा सकता है। यह घोषणा दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए रक्षा समझौते के बाद आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और इजरायल की धमकियों के बीच स्ट्रैटेजिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
इजरायल को सीधा संदेश
विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान का यह बयान सीधे तौर पर इजरायल को संदेश है। इजरायल को मध्य-पूर्व का अकेला परमाणु संपन्न देश माना जाता है। हाल ही में इजरायल ने कतर में हमास नेताओं पर हमला किया, जिसमें छह लोग मारे गए थे। ऐसे में खाड़ी देशों में सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हैं।
अंतरराष्ट्रीय चिंता
यह बयान न केवल भारत बल्कि अमेरिका और इजरायल के लिए भी चिंताजनक हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मध्य-पूर्व में नए परमाणु हथियारों की दौड़ को जन्म दे सकता है।
सऊदी-पाकिस्तान रक्षा संबंध
सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच सैन्य और आर्थिक सहयोग कई दशकों पुराना है। बुधवार को हुए समझौते के अनुसार, किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा। यह समझौता गाजा पट्टी में इजरायल-हमास संघर्ष के बीच हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम सऊदी अरब की आर्थिक सहायता के बिना संभव नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों के बावजूद सऊदी अरब ने पाकिस्तान को वित्तीय मदद दी थी।
भारत-पाकिस्तान परमाणु स्थिति
- भारत के पास लगभग 172 परमाणु हथियार हैं।
- पाकिस्तान के पास लगभग 170 परमाणु हथियार हैं।