मनमिन्दर अरोड़ा, कुल्लू
कुल्लू जिले की मणिकर्ण घाटी इन दिनों जछनी नाले से परेशान है। पिछले एक महीने से यह नाला भुंतर–मणिकर्ण मार्ग को बार-बार बाधित कर रहा है। इसके चलते करीब 40 हज़ार की आबादी और घाटी के सैकड़ों गांव रोज़मर्रा की समस्याओं से जूझ रहे हैं।
साफ मौसम में भी नाले से मलबा सड़क पर आ रहा है। नतीजा यह कि घंटों तक जाम की स्थिति बनी रहती है। लोगों को 6 से 10 घंटे तक इंतज़ार करना पड़ता है। यहां तक कि एंबुलेंस तक फंस जाती है और मरीजों को परिजन पैदल ही ढालपुर अस्पताल तक ले जाने को मजबूर हैं।
वैकल्पिक सड़क की उठी मांग
स्थानीय लोगों की मांग है कि जिस तरह मनाली तक दो वैकल्पिक सड़कें बनी हुई हैं, उसी तरह भुंतर से मणिकर्ण तक भी दूसरी सड़क बनाई जाए। उनका कहना है कि इससे पर्यटन, कारोबार और आपातकालीन सेवाओं को बड़ी राहत मिलेगी।
प्रदेश भाजपा कार्यसमिति सदस्य नरोत्तम ठाकुर ने कहा कि “पिछले साल तीन लाख से अधिक पर्यटक वाहन मणिकर्ण पहुंचे थे। अगर सड़कें बेहतर होतीं तो यह संख्या पांच लाख पार कर सकती थी। लोक निर्माण विभाग करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकाल पाया है। इस बरसात में सड़क कई जगहों पर 10 फीट तक धंस चुकी है, जिससे सफर खतरे से खाली नहीं रहा।”
ठाकुर ने सरकार से मांग की है कि घाटी की पर्यटन, कृषि और बागवानी गतिविधियों को बचाने के लिए वैकल्पिक सड़क निर्माण पर तुरंत कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि ऐसा होने से हजारों परिवारों की जिंदगी और रोज़गार पटरी पर लौट सकेंगे।