मुंबई | भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक हालिया शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई के लिए मौद्रिक नीति में 0.25 प्रतिशत की कटौती करना “सर्वोत्तम विकल्प” हो सकता है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि केंद्रीय बैंक अपनी द्विमासिक नीति में मौजूदा दरों को यथास्थिति पर ही बनाए रख सकता है।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति (MPC) सोमवार से तीन दिवसीय विचार-मंथन शुरू करेगी। बैठक का मुख्य एजेंडा नीतिगत दर तय करना है। यह बैठक भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने की पृष्ठभूमि में हो रही है। MPC का निर्णय एक अक्टूबर 2025 (बुधवार) को घोषित किया जाएगा।
मुद्रास्फीति में नरमी और रेपो दर
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित मुद्रास्फीति में गिरावट के बीच, आरबीआई ने फरवरी 2025 से तीन किस्तों में रेपो दर में कुल 1% कटौती की है। अगस्त की द्विमासिक नीति में केंद्रीय बैंक ने दर को यथास्थिति पर बनाए रखा।
SBI के अध्ययन में कहा गया कि आगामी नीति में 0.25 प्रतिशत की रेपो दर कटौती तर्कसंगत और उपयुक्त होगी, क्योंकि अगले वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति नरम बनी रहने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों की राय
- मदन सबनवीस (बैंक ऑफ बड़ौदा): “इस नीति में रेपो दर में बदलाव की गुंजाइश सीमित है, लेकिन बाजार की धारणा दर में कटौती की है।”
- अदिति नायर (ICRA): “जीएसटी सुधार से मुद्रास्फीति कम होगी, लेकिन मांग बढ़ेगी। अक्टूबर समीक्षा में दर यथास्थिति रहने की संभावना है।”
- धर्मकीर्ति जोशी (CRISIL): “अपेक्षा से कम मुद्रास्फीति के कारण अक्टूबर तक रेपो दर में कटौती संभव है।”