जालंधर | पंजाब विधानसभा के सत्र के अंतिम दिन विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच भारी हंगामा देखने को मिला। सरदूलगढ़ से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक गुरप्रीत सिंह बनावली ने विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा से पंजाब को ‘कंगला’ कहे जाने पर सार्वजनिक माफी मांगने की मांग उठाई।
सत्र में बोलते हुए गुरप्रीत ने कहा कि बाढ़ की वजह से राज्य में हुए व्यापक नुकसान के बीच पंजाब की माताएं, बहनें और युवा विधानसभा की ओर उम्मीद भरी निगाहें लगाए बैठे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बाढ़ पीड़ितों के लिए SDRF और NDRF के तहत मुआवजा नियमों में सुधार की जरूरत है, ताकि प्रभावितों को सही समय पर राहत मिल सके।
विधायक ने प्रताप सिंह बाजवा के बयान पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, “पंजाब कभी ‘कंगला’ नहीं हो सकता। यह प्रदेश कई बार गिरा, लेकिन हमेशा फिर से खड़ा हुआ है। बाजवा को पंजाब और उसकी जनता का अपमान करने के लिए माफी मांगनी चाहिए।” उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को समय न देना राज्य के अपमान के समान है।
गुरप्रीत सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को याद दिलाया कि यह वही पंजाब है जिसने सीमा पर पूरे दमखम से देश की रक्षा की है। उन्होंने कहा कि केंद्र को आज पंजाब के साथ खड़ा होना चाहिए।
भाजपा द्वारा सत्र में बहिष्कार किए जाने पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि “जो नेता बाहर बैठकर विरोध कर रहे हैं, उन्हें विधानसभा में आकर खुलकर बहस में भाग लेना चाहिए। पंजाब के हित में खुला संवाद होना चाहिए। नाटक करने से कुछ हासिल नहीं होगा।”
विधायक ने राजनीतिक इतिहास और पुनर्गठन एक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि परगट सिंह और अन्य नेताओं को उन गलतियों के लिए माफी मांगनी चाहिए जो पूर्ववर्तियों ने की थीं। उन्होंने कहा कि अगर एसवाईएल नहर का निर्माण समय पर हुआ होता और चंडीगढ़ राजधानी के रूप में सही तरीके से दिया गया होता, तो पंजाब को आज इन समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता।