पंचकूला | ट्राइसिटी क्षेत्र में इस वर्ष दशहरा उत्सव को ऐतिहासिक बनाने की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इस बार पंचकूला के शालीमार ग्राउंड में उत्तर भारत का सबसे ऊंचा रावण का पुतला जलाया जाएगा। यह पुतला 180 फीट ऊंचा है और इसकी निर्माण लागत, साथ ही इसे बनाने वाली टीम की मेहनत और लगन इसे खास बनाती है।
दशहरा महोत्सव का भव्य आयोजन
शालीमार ग्राउंड में दशहरा महोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं। श्री माता मनसा देवी चैरिटेबल ट्रस्ट दशहरा कमेटी और आदर्श रामलीला ड्रामाटिक क्लब मिलकर इस विशाल महोत्सव का आयोजन कर रहे हैं।
- इस बार लगभग एक दशक बाद पहली बार कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का भी दहन किया जाएगा।
- कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले प्रत्येक 100 फीट ऊंचे हैं।
- तीनों पुतलों की कुल निर्माण लागत लगभग ₹18 लाख है।
पानीपत में भी होगा रावण दहन
पानीपत में 6 स्थानों पर रावण दहन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे:
- सेक्टर 25: 100 फीट ऊंचा पुतला
- सेक्टर 13: 80 फीट
- देवी मंदिर: 65 फीट
- शिवाजी स्टेडियम: 70 फीट
- सेक्टर 24: 95 फीट
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक
दशहरा या विजयादशमी हर साल आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्री राम ने अहंकारी रावण का वध किया था। रावण के पुतले का दहन समाज में बुराई के अंत और सत्य की विजय का संदेश देता है।
इस विशाल आयोजन को देखने के लिए ट्राइसिटी और आसपास के क्षेत्रों से हजारों लोग पंचकूला पहुंचने की उम्मीद कर रहे हैं।