चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार ने रविवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए, जो राज्य के सामाजिक, प्रशासनिक और कृषि क्षेत्र में बदलाव लाएंगे।
महिलाओं को केमिकल और इंजीनियरिंग फैक्ट्रियों में रोजगार
अब महिलाएं खतरनाक केमिकल और इंजीनियरिंग से जुड़ी फैक्ट्रियों में काम कर सकेंगी, जिससे उनके पास रोजगार के अधिक विकल्प खुलेंगे। हालांकि यह भी तय किया गया कि गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं जोखिम भरे कार्य नहीं करेंगी।
ग्राम पंचायतों को भूमि उपयोग की अधिक स्वतंत्रता
ग्राम पंचायत अब अपने स्तर पर 250 एकड़ तक की भूमि के उपयोग की योजना बना सकेंगी, जबकि पहले यह सीमा 100 एकड़ थी। पट्टे की जमीन का 4% हिस्सा दिव्यांगों के लिए आरक्षित किया गया है, ताकि वे खेती कर सकें।
ग्राम सभा के कोरम में बदलाव
ग्राम सभा की बैठक में किसी सरकारी योजना के लाभार्थियों पर निर्णय लेने के लिए अब 40% सदस्य उपस्थिति अनिवार्य होगी। पहले यह कोरम केवल 10% था। यदि पहली या दूसरी बैठक स्थगित होती है, तो क्रमशः 30% और 20% उपस्थिति वाले सदस्यों को भी कोरम मान लिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे पंचायती राज में पारदर्शिता और कार्यप्रणाली में सुधार आएगा।
एचएसवीपी में हाउसिंग बोर्ड का विलय
कैबिनेट ने हरियाणा हाउसिंग बोर्ड को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) में विलय करने का निर्णय लिया। सरकार का मानना है कि इस कदम से शहरी विकास और आवास संबंधी कार्यों को सुव्यवस्थित किया जा सकेगा और प्रशासनिक दोहराव खत्म होगा।
ऑनलाइन शुल्क जमा और पशुपालन के लिए पट्टे की भूमि
अब देय शुल्क ऑनलाइन जमा किया जा सकेगा। इसके अलावा, गौ अभ्यारण और डेयरी के लिए पशुपालन विभाग या हरियाणा गौसेवा आयोग को भूमि 20 वर्ष के लिए पट्टे पर दी जाएगी, जिसकी दर 5100 रुपए प्रति एकड़ प्रति वर्ष होगी।
लोकपाल अब सुनेंगे एचआईवी/एड्स पीड़ितों की शिकायतें
कैबिनेट ने एचआईवी और एड्स पीड़ितों की शिकायतों के निपटान के लिए नियम बनाने की मंजूरी दी। राज्य सरकार अपने छह प्रशासनिक प्रभागों के आयुक्तों को लोकपाल के रूप में नामित करेगी। निजी अस्पतालों को निर्देश दिया जाएगा कि वे एचआईवी पॉजिटिव मामलों की जानकारी एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र या सरकारी अस्पताल को दें।
आदतन अपराधी और अपराध मुक्त प्रावधानों में संशोधन
बैठक में आदतन अपराधी की परिभाषा को शामिल करने और छोटे तकनीकी अपराधों को अपराध मुक्त करने के लिए संशोधन को मंजूरी दी गई। अगर किसी व्यक्ति को दो या अधिक बार पांच वर्ष की सजा मिली हो, तो उसे आदतन अपराधी माना जाएगा। वहीं, 17 विभागों के 42 राज्य कानून में शामिल 164 प्रावधान अब अपराध मुक्त होंगे, जो तकनीकी और प्रक्रियात्मक चूकों के लिए दिवानी दंड और प्रशासनिक कार्रवाई के अंतर्गत आएंगे।