नई दिल्ली। अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति और तालिबान विरोधी मोर्चे के प्रमुख नेता अमरुल्लाह सालेह ने दिवाली के अवसर पर भारत और विश्वभर के हिंदुओं को शुभकामनाएं दी हैं। हालांकि, बधाई संदेश के साथ उन्होंने दारुल उलूम देवबंद मदरसे को लेकर सतर्क रहने की सलाह भी दी है।
सालेह ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा— “सभी भारतीयों और दुनिया भर के हिंदुओं को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं! कृपया देवबंद मदरसे पर ध्यान रखें।”
उनकी यह टिप्पणी हाल ही में भारत आए तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी के देवबंद दौरे से जोड़कर देखी जा रही है। मुत्तकी को भारत सरकार ने देवबंद जाने की अनुमति दी थी, जिसे कूटनीतिक स्तर पर एक संदेशात्मक कदम माना गया।
सालेह क्यों दे रहे हैं यह चेतावनी?
अमरुल्लाह सालेह अफगानिस्तान में तालिबान की नीतियों और पाकिस्तान की आईएसआई के दखल के कट्टर आलोचक रहे हैं। 2021 में तालिबान कब्जे के दौरान वे उपराष्ट्रपति थे और बाद में अहमद मसूद के साथ तालिबान विरोधी नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट (NRF) से जुड़ गए।
तालिबान और देवबंद का ऐतिहासिक संबंध
- तालिबान के कई वरिष्ठ नेता पाकिस्तान स्थित दारुल उलूम हक्कानिया से पढ़े हैं।
- यह मदरसा देवबंद विचारधारा से प्रभावित माना जाता है।
- हक्कानिया मदरसे के संस्थापक मौलाना अब्दुल हक ने देवबंद से शिक्षा ली थी।
- उनके बेटे मौलाना समी-उल-हक को “तालिबान का जनक” कहा जाता है।
सालेह के इस बयान ने भारत की सुरक्षा और कूटनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। उनके संदेश को तालिबान की बढ़ती सक्रियता और दक्षिण एशिया में कट्टरपंथी संगठनों की गतिविधियों पर चेतावनी संकेत के रूप में देखा जा रहा है।