Shimla,27 October
आगामी अंतरराष्ट्रीय लवी मेला रामपुर-2025 में इस बार अश्व प्रदर्शनी का खास आकर्षण होगा चामुर्थी नस्ल का हिमालयी घोड़ा, जो अपनी ताकत, सहनशीलता और ठंडे इलाकों में काम करने की क्षमता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि चामुर्थी घोड़े की पहचान और बिक्री को बढ़ावा देने के लिए इस बार पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अश्वपालकों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। पशुपालन विभाग ने इन राज्यों के संबंधित विभागों को आधिकारिक निमंत्रण पत्र भेज दिए हैं।उन्होंने कहा कि “लवी मेला सैकड़ों वर्ष पुराना ऐतिहासिक मेला है और चामुर्थी घोड़े की बिक्री इसका प्रमुख आकर्षण रहा है। इस नस्ल के प्रचार-प्रसार के लिए अन्य राज्यों के अश्वपालकों को आमंत्रित किया गया है ताकि वे इसकी विशेषताओं को नज़दीक से देख सकें और इच्छानुसार खरीद भी सकें।
चीन सीमा से सटे लाहौल-स्पीति और किन्नौर जैसे बर्फीले क्षेत्रों में चामुर्थी घोड़ा सदियों से स्थानीय जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा रहा है। इसे ‘शीत मरुस्थल का जहाज’ भी कहा जाता है। यह नस्ल -30 डिग्री तापमान में भी काम करने में सक्षम है और लंबे समय तक बिना भोजन के भी सक्रिय रह सकती है। चामुर्थी घोड़े भारतीय घोड़ा नस्लों में शामिल छह प्रमुख नस्लों में से एक है।बैठक में सहायक आयुक्त देवी चंद ठाकुर, उपनिदेशक पशुपालन विभाग डॉ. नीरज मोहन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
अश्व प्रदर्शनी 1 से 3 नवंबर तक
लवी मेले के अंतर्गत यह अश्व प्रदर्शनी 1 से 3 नवंबर 2025 तक आयोजित की जाएगी।
- 1 नवंबर को अश्वों का पंजीकरण,
- 2 नवंबर को अश्वपालकों की गोष्ठी,
- 3 नवंबर को उत्तम अश्व चयन, गुब्बारा फोड़ प्रतियोगिता और 400 व 800 मीटर की घुड़दौड़ प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
विजेताओं को मुख्य अतिथि द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा। पशुपालन विभाग की ओर से प्रदर्शनी में भाग लेने वाले सभी अश्वों के लिए निःशुल्क चारा व दाना भी उपलब्ध कराया जाएगा।
लारी में चामुर्थी प्रजनन केंद्र बन रहा संरक्षक
चामुर्थी घोड़े की लुप्तप्राय होती नस्ल को संरक्षित रखने के लिए सन् 2002 में स्पीति घाटी के लारी में घोड़ा प्रजनन केंद्र स्थापित किया गया।
यह केंद्र 82 बीघा 12 बिस्वा भूमि पर फैला है और इसे तीन इकाइयों में विभाजित किया गया है, जिनमें प्रत्येक इकाई में 20 घोड़े रखने की क्षमता है। वर्षों की मेहनत से इस नस्ल की संख्या में अब निरंतर वृद्धि हो रही है।
तिब्बती जड़ें और सदियों पुराना इतिहास
विशेषज्ञों के अनुसार, चामुर्थी नस्ल की उत्पत्ति तिब्बत के छुर्मूत क्षेत्र में हुई, जिससे इसका नाम ‘चामुर्थी’ पड़ा। यह घोड़ा पिन घाटी और किन्नौर की भावा वैली में पाया जाता है और दुनिया की मान्यता प्राप्त प्रमुख नस्लों में से एक है।
पिन घाटी में हर साल अप्रैल-मई माह में सर्वश्रेष्ठ घोड़े का चयन किया जाता है। स्थानीय परंपरा के अनुसार शेष घोड़ों की नसबंदी कर दी जाती है, क्योंकि माना जाता है कि ऐसा न करने से देवता नाराज होते हैं। हालांकि पशु विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रथा नस्ल विस्तार की दृष्टि से नुकसानदायक है।