नई दिल्ली। अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापारिक तनाव के बीच दक्षिण कोरिया के बुसान में हुई ऐतिहासिक बैठक ने दुनिया का ध्यान खींचा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच यह आमने-सामने की वार्ता बेहद सफल रही। बैठक के बाद ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका, चीन पर लगाए गए 20 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क को घटाकर 10 प्रतिशत करेगा। यह शुल्क फेंटानिल जैसे मादक पदार्थों के उत्पादन में उपयोग होने वाले रसायनों की बिक्री को लेकर लगाया गया था।
बैठक के बाद ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “अगर इस बैठक को 0 से 10 के पैमाने पर आकलित करूं, तो मैं इसे 12 दूंगा — यह शानदार रही।” उन्होंने यह भी बताया कि अप्रैल में वह चीन का दौरा करेंगे, जबकि शी जिनपिंग इसके बाद अमेरिका आएंगे।
व्यापारिक संबंधों में नई शुरुआत
ट्रंप ने कहा कि वह चीन के साथ एक नया व्यापार समझौता जल्द साइन करने की उम्मीद रखते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, एआई, तकनीकी नियंत्रण और यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दों पर मतभेद बने रहने के बावजूद यह मुलाकात दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में बड़ा कदम है।
बैठक के बाद चीन ने दुर्लभ धातुओं के निर्यात नियंत्रण में ढील देने और अमेरिका से सोयाबीन खरीदने पर सहमति जताई। वहीं, अमेरिका ने भी अपने संयुक्त टैरिफ को 57% से घटाकर 47% करने का फैसला किया।
“G2” साझेदारी की ओर संकेत
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यह बैठक “G2” का प्रतीक है — यानी दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की साझेदारी। यह मुलाकात किसी सम्मेलन हॉल में नहीं, बल्कि बुसान एयरबेस पर हुई, जो सादगी और गंभीरता का संदेश देती है।
मतभेदों के बावजूद सहयोग जारी
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा, “हर मुद्दे पर राय समान नहीं हो सकती, लेकिन मतभेदों के बावजूद सहयोग जारी रहेगा।” चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ ने इसे “आर्थिक स्थिरता का नया मोड़” बताया।
विश्लेषकों के मुताबिक, यह बैठक वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है और इससे अमेरिका-चीन संबंधों में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है।