हरियाणा I हरियाणा कांग्रेस में एक बार फिर आंतरिक कलह खुलकर सामने आई है। छह बार के विधायक और पूर्व मंत्री प्रोफेसर संपत सिंह ने पार्टी से इस्तीफा देकर कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने रविवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को चार पन्नों का इस्तीफा पत्र भेजा, जिसमें कांग्रेस संगठन पर परिवारवाद, गुटबाजी और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी के आरोप लगाए गए।
प्रो. संपत सिंह ने लिखा कि कांग्रेस अब विचारधारा की नहीं, बल्कि व्यक्तिवाद और परिवारवाद की कैद में फंस चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 से लगातार हार के बावजूद पार्टी में जवाबदेही तय नहीं की गई, और 15 वर्षों से एक ही नेतृत्व कायम है।
उनका इस्तीफा ऐसे समय पर आया है जब सोमवार को चंडीगढ़ में कांग्रेस की दो अहम बैठकें होने वाली हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान नारनौंद में कुमारी सैलजा के साथ मंच साझा करने की वजह से उन्हें टिकट से वंचित कर दिया गया।
दलित नेताओं का अपमान और टिकट वितरण पर सवाल
प्रो. संपत सिंह ने कांग्रेस पर दलित नेताओं को अपमानित करने और टिकट वितरण में धनबल और सिफारिश को तरजीह देने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा कि पार्टी ने योग्य नेताओं की अनदेखी कर परिवारवाद को बढ़ावा दिया है।
उन्होंने कहा कि 2016 के राज्यसभा चुनाव से लेकर 2020 में “नेता पुत्र” को राज्यसभा भेजे जाने तक, हर कदम इस बात की पुष्टि करता है कि हरियाणा कांग्रेस अब परिवार केंद्रित पार्टी बन चुकी है।
इनेलो से नजदीकियां और संभावित नई पारी
25 सितंबर को देवीलाल जयंती पर रोहतक में आयोजित इनेलो की शक्ति प्रदर्शन रैली में प्रो. संपत सिंह ने अभय चौटाला के साथ मंच साझा किया था। उस समय से ही यह अटकलें थीं कि वह जल्द बड़ा राजनीतिक कदम उठा सकते हैं। अब उनके इस्तीफे के बाद उनके इनेलो में शामिल होने की संभावना और मजबूत हो गई है।