चंडीगढ़ I हरियाणा जेल विभाग ने शराब ठेकेदार से जबरन वसूली के आरोपी और दिवंगत आईपीएस अधिकारी वाई. पूरण कुमार की संदिग्ध आत्महत्या मामले में मुख्य गवाह एएसआई सुशील कुमार को बैरक के अंदर धमकी दिए जाने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
विभाग के अनुसार, प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि सुशील कुमार को किसी भी प्रकार की धमकी नहीं दी गई। बैरक में मौजूद 8–9 कैदियों से पूछताछ की गई, जिसमें पता चला कि केवल टीवी की आवाज को लेकर कैदियों के बीच बहस हुई थी। किसी तरह की धमकी या जान का खतरा होने जैसा कोई तथ्य नहीं मिला। जेल विभाग ने पूरी रिपोर्ट सरकार को भेज दी है।
पत्नी ने लगाए थे गंभीर आरोप
माह की शुरुआत में सुशील कुमार की पत्नी सोनी देवी ने आरोप लगाया था कि रोहतक की सुनारिया जेल में उनके पति को लगातार धमकियां मिल रही हैं और उनकी जिंदगी खतरे में है। उन्होंने दावा किया था कि सुशील ‘साधारण कैदी’ नहीं हैं, बल्कि आईपीएस वाई. पूरण कुमार आत्महत्या मामले के महत्वपूर्ण गवाह हैं, और वही यह साबित कर सकते हैं कि रोहतक में दर्ज जबरन वसूली की एफआईआर झूठी और एक बड़ी साजिश का हिस्सा है।
क्या है पूरा मामला
एएसआई सुशील कुमार दिवंगत आईपीएस वाई. पूरण कुमार के स्टाफ में शामिल थे। उन्हें 6 अक्टूबर को रोहतक के अर्बन एस्टेट थाने में दर्ज जबरन वसूली के एक केस में गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि वह एक शराब ठेकेदार से हर महीने 2.5 लाख रुपये की मांग कर रहे थे। उनकी गिरफ्तारी के अगले ही दिन आईपीएस वाई. पूरण कुमार ने चंडीगढ़ स्थित अपने आवास पर आत्महत्या कर ली थी।
गंभीर आरोप सामने आने के बाद जेल विभाग ने सुशील कुमार को सुरक्षा कारणों से रोहतक से अंबाला जेल शिफ्ट कर दिया था और मामले की जांच भी शुरू की थी।
जांच अधिकारी के मुताबिक, बैरक में मौजूद सभी कैदियों के बयान दर्ज किए गए और तथ्यों की गहन जांच की गई। जेल विभाग के महानिदेशक आलोक राय ने बताया कि आरोपों का कोई आधार नहीं मिला है और जांच में धमकी की बात असत्य पाई गई है।