नई दिल्ली। संविधान दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम एक भावनात्मक और प्रेरणादायी पत्र जारी किया। इस चिट्ठी में उन्होंने भारतीय संविधान के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त की और बताया कि कैसे इस महान दस्तावेज़ ने एक सामान्य परिवार से आने वाले व्यक्ति को देश का नेतृत्व करने का अवसर दिया।
पीएम मोदी ने कहा कि “संविधान की ताकत ही है कि मुझ जैसे साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले व्यक्ति को 24 वर्ष से भी अधिक समय तक सरकार का नेतृत्व करने का सौभाग्य मिला।” उन्होंने 2014 में संसद भवन में प्रवेश के क्षण को याद करते हुए कहा कि लोकतंत्र के इस सर्वोच्च मंदिर की सीढ़ियों पर सिर झुकाना उनके जीवन का अविस्मरणीय पल रहा।
2015 में शुरू हुई संविधान दिवस की परंपरा
प्रधानमंत्री ने पत्र में बताया कि वर्ष 2015 में उनकी सरकार ने 26 नवंबर को आधिकारिक रूप से संविधान दिवस घोषित किया था, ताकि संविधान के महत्व और हमारे मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।
2019 में चुनाव जीतने के बाद सेंट्रल हॉल में संविधान को माथे से लगाने का क्षण भी उन्होंने याद किया और कहा कि यह भावनात्मक अनुभव हमेशा उनके साथ रहेगा।
संविधान निर्माताओं को श्रद्धांजलि
पीएम मोदी ने संविधान सभा के महान नेताओं—
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद
- डॉ. बी.आर. अंबेडकर
- और कई अन्य वरिष्ठ सदस्यों, विशेषकर महिला प्रतिनिधियों
—को याद करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी विचारों ने भारतीय संविधान को अद्वितीय बनाया।
उन्होंने गुजरात में आयोजित संविधान गौरव यात्रा, संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर हुए संसद के विशेष सत्र, और देशभर में हुई ऐतिहासिक जनभागीदारी का भी उल्लेख किया।
कर्तव्यों की महत्ता पर जोर
पीएम मोदी ने लिखा कि इस वर्ष का संविधान दिवस विशेष है क्योंकि यह—
- सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती,
- भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती,
- वंदे मातरम के 150 वर्ष,
- और गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ
—जैसे महत्वपूर्ण अवसरों के साथ मनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ये सभी महान विभूतियां हमें संविधान के अनुच्छेद 51(A) में बताए गए नागरिक कर्तव्यों की याद दिलाती हैं।
2049: स्वतंत्रता के 100 वर्ष का लक्ष्य
भविष्य की ओर संकेत करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आगामी दो दशक बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि 2047 में भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा और 2049 में संविधान को भी 100 वर्ष हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि आज लिए गए निर्णय आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तय करेंगे, इसलिए हर नागरिक को अपने कर्तव्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
युवाओं को जिम्मेदारी निभाने का आग्रह
मोदी ने मतदान के अधिकार को लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए स्कूलों और कॉलेजों से आग्रह किया कि वे 18 वर्ष के नए मतदाताओं को सम्मानित करके संविधान दिवस मनाएं। उनका विश्वास है कि इससे युवाओं में कर्तव्य-भावना और राष्ट्रीय गर्व और मज़बूत होगा।
एक विकसित भारत के संकल्प का आह्वान
अपने पत्र के अंत में प्रधानमंत्री ने सभी नागरिकों से एक मजबूत और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने लिखा कि— “हमारा संविधान मानव गरिमा, समानता और स्वतंत्रता को सर्वोच्च स्थान देता है। आइए, हम अपने कर्तव्यों को निभाकर लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करें।”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए उन्होंने संविधान निर्माताओं को नमन किया और कहा कि उनका विज़न आज भी देश का मार्गदर्शन कर रहा है।