Shimla, 26 November-:भारत सरकार द्वारा अधिसूचित चार लेबर कोडों के विरोध में सीटू, हिमाचल किसान सभा, हिमाचल सेब उत्पादक संघ, एसएफआई, डीवाईएफआई, जनवादी महिला समिति, एआईएलयू, पेंशनर एसोसिएशन सहित विभिन्न जनसंगठनों ने आज राष्ट्रीय आह्वान पर प्रदेशभर में जिला और ब्लॉक मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन किए। संगठनों ने इन लेबर कोड को मजदूर–किसान विरोधी करार देते हुए इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारी मजदूरों और किसानों ने 26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन, आउटसोर्स और ठेका कर्मचारियों की नियमितीकरण नीति, 12 घंटे ड्यूटी और महिलाओं की नाइट शिफ्ट संबंधी आदेश वापिस लेने, कृषि फसलों के लिए एमएसपी लागू करने, किसानों की बेदखली रोकने, फोरलेन और राष्ट्रीय राजमार्गों में अधिगृहित भूमि का चार गुना मुआवजा देने की मांग उठाई। इसके साथ ही मनरेगा में 200 दिन रोजगार तथा 500 रुपये दिहाड़ी, आपदा प्रभावितों का पुनर्वास, दूध उत्पादकों को एमएसपी भुगतान और स्मार्ट मीटर व सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण पर रोक लगाने की भी मांग की गई।संविधान दिवस पर आयोजित इन प्रदर्शनों में डॉ. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी गई तथा संविधान में निहित मेहनतकश जनता के अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया गया। शिमला में बड़ी संख्या में मजदूर, किसान, छात्र, युवा और महिलाएं नगर निगम कार्यालय के निकट पंचायत घर पर जुटे और रैली के रूप में सर्कुलर रोड, सब्जी मंडी ग्राउंड और लोअर बाजार होते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंचे, जहां जनसभा आयोजित हुई।
वक्ताओं ने कहा कि नए लेबर कोड लागू होने से लगभग 70–74 प्रतिशत औद्योगिक मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे। ईपीएफ, ईएसआई और बोनस जैसे महत्वपूर्ण कानून सीधे प्रभावित होंगे। इन कोडों से ठेका और आउटसोर्स कर्मियों की सुरक्षा कमजोर होगी, फिक्स टर्म रोजगार और हायर–एंड–फायर नीति को बढ़ावा मिलेगा, जो मजदूर वर्ग के लिए शोषणकारी सिद्ध होगा।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त करके वेतन कोड 2019, औद्योगिक संबंध कोड 2020, सामाजिक सुरक्षा कोड 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य कोड 2020 को बिना व्यापक चर्चा के लागू कर दिया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत है। वक्ताओं ने मांग की कि पुराने श्रम कानून बहाल किए जाएं और किसी भी सुधार को लागू करने से पहले मजदूर संगठनों के साथ विस्तृत संवाद हो।