Shimla, 4 December-:हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के जुब्बल तहसील के झड़ग गांव में 54 वर्ष बाद शांत महायज्ञ अनुष्ठान गुरुवार से शुरू हो गया है। हाटकोटी से दुर्गा माता की देव डोली पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ झड़ग गांव पहुंची, जहां तीन दिवसीय अनुष्ठान औपचारिक रूप से आरंभ हुआ। देवी-देवताओं के आगमन के साथ गांव में धार्मिक उत्साह का माहौल बन गया है। आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है।
वहीं शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने गुरुवार को जुब्बल उपमंडल के झड़ग गांव में आयोजित शांत महायज्ञ में भाग लिया। यह महायज्ञ 4 से 6 दिसंबर तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। आयोजन में नागेश्वर देवता की पूजा-अर्चना की जा रही है, और विभिन्न क्षेत्रों से देव समुदाय भी पहुंच रहा है।शिक्षा मंत्री ने इस अवसर पर स्थानीय लोगों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लगभग 54 वर्षों बाद आयोजित हो रहा यह महायज्ञ क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा कि हिमाचल की पहचान उसकी देव संस्कृति और परंपराओं से है, और इन्हीं मान्यताओं के कारण प्रदेश को देवभूमि कहा जाता है। उन्होंने बताया कि नागेश्वर देवता बुशहर और जुब्बल दोनों क्षेत्रों के आराध्य देवता हैं, और इस महायज्ञ में बुशहर क्षेत्र के लगभग 20 देवताओं की उपस्थिति दर्ज की गई है।अनुष्ठान के दौरान भीड़ और यातायात को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। जगह-जगह पुलिस जवान तैनात हैं और कार्यक्रम स्थल के आसपास विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अनुष्ठान के दौरान अस्त्र-शस्त्र लेकर चलना और इनके साथ नृत्य करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। पारंपरिक तौर पर लोग शांत अनुष्ठान में हथियारों के साथ नाचते थे, लेकिन इस बार सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए यह अनुमति नहीं दी जाएगी।जुब्बल के एसडीएम गुरमीत नेगी ने बताया कि 6 दिसंबर तक चलने वाले इस महायज्ञ के दौरान सभी लोगों को प्रशासन द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करना आवश्यक होगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासनिक टीमें लगातार निगरानी में रहेंगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से पार्किंग, बैरियर और यातायात व्यवस्था से संबंधित निर्देशों का सम्मानपूर्वक पालन करने की अपील की।
महायज्ञ के शुभारंभ से पहले बुधवार सुबह झोऊटा गांव के खूंद पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ मंदिर पहुंचे। मंदिर के कपाट खुलने से पूर्व पटाखों की आवाज के बीच उनका स्वागत किया गया। मंदिर प्रांगण में खूंदों ने अपनी पारंपरिक भूमिका निभाते हुए नाटी भी प्रस्तुत की। मंदिर के गर्भगृह में बीते एक सप्ताह से हवन चल रहा है। मंदिर कमेटी के प्रमुख राय लाल मेहता ने बताया कि कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। शुक्रवार को शिखा पूजन और फेर की मुख्य रस्म संपन्न होगी।