कुरुक्षेत्र |राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अवैध हथियार और गोला-बारूद तस्करी के संगठित नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में 22 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। इस कार्रवाई में एजेंसी ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और एक करोड़ रुपये नकद सहित बड़ी मात्रा में हथियार व डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं।
हरियाणा में कुरुक्षेत्र के दो ठिकानों पर छापा
NIA की टीमों ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में दो स्थानों पर छापेमारी की, जहां से विजय कालरा और कुश कालरा को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि हरियाणा से ही यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश, बिहार और देश के कई हिस्सों में अवैध हथियार और कारतूस की सप्लाई करता था।
हरियाणा में नेटवर्क की सक्रियता को देखते हुए NIA ने यहां से बरामद डिजिटल सबूतों और संपर्कों को केस की मुख्य कड़ी बताया है।
बिहार-यूपी में भी बड़े पैमाने पर तलाशी
बिहार में पटना, नालंदा और शेखपुरा जिलों के सात ठिकानों पर छापेमारी की गई। वहीं उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में 13 स्थानों पर तलाशी ली गई। इन ऑपरेशनों के दौरान एजेंसी ने शशि प्रकाश (पटना) और रवि रंजन सिंह (शेखपुरा) को गिरफ्तार किया।
NIA को इन ठिकानों से हथियार, कारतूसों के बॉक्स, संदिग्ध डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल डिवाइस, लैपटॉप और फर्जी पहचान पत्र मिले हैं।
एक करोड़ रुपये नकद और बड़ी मात्रा में हथियार बरामद
सूत्रों के अनुसार, तीनों राज्यों में हुई कार्रवाई में लगभग एक करोड़ रुपये नकद, विभिन्न बोर के हथियार, बड़ी मात्रा में गोला-बारूद और संवेदनशील डेटा से भरे डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं। जब्त किए गए फर्जी दस्तावेजों से एजेंसी को गिरोह के नेटवर्क और फाइनेंसिंग पैटर्न का भी महत्वपूर्ण इनपुट मिला है।
हरियाणा से जुड़े तार और विस्तृत जांच जारी
प्रारंभिक जांच से पता चला है कि यह गिरोह लंबे समय से हरियाणा के सप्लायर्स के संपर्क में था। यहां से अवैध हथियारों और कारतूसों की सप्लाई उत्तर प्रदेश और बिहार में सक्रिय अपराधियों, मध्यस्थों और तस्करों तक पहुंचाई जाती थी। NIA इस नेटवर्क के फंडिंग स्रोत, अवैध निर्माण इकाइयों और डिलीवरी चैनल का विश्लेषण कर रही है।
जून–जुलाई में बनी थी कार्रवाई की आधारशिला
यह पूरा मामला तब सामने आया जब इस साल जून–जुलाई में बिहार पुलिस ने बड़े पैमाने पर अवैध हथियार और सैकड़ों कारतूस बरामद किए थे। उस दौरान राजेंद्र प्रसाद, कुमार अभिजीत, शत्रुधन शर्मा और विशाल कुमार को गिरफ्तार किया गया था।
इन गिरफ्तारियों के बाद मामले की गंभीरता देखते हुए गृह मंत्रालय के निर्देश पर अगस्त 2025 में NIA को जांच सौंपी गई, जो अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है।