Una, Rakesh-:खनन पट्टे की शर्तों और हिमाचल प्रदेश खनिज नियमों के लगातार उल्लंघन पर ऊना जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा कदम उठाया है। जिला प्रशासन ने ललड़ी क्षेत्र में संचालित सतलुज स्टोन क्रशर एवं स्क्रीनिंग प्लांट की बिजली आपूर्ति को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। आदेशों के अनुसार प्लांट में किसी भी प्रकार की नई क्रशिंग गतिविधि अब पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। हालांकि, प्रशासन ने प्लांट परिसर में पहले से संग्रहित सामग्री की लोडिंग और ट्रांसपोर्टेशन की अनुमति जारी रखने का निर्णय लिया है, ताकि उपलब्ध स्टॉक का उचित निपटान किया जा सके और सामग्री बेकार न जाए।
नई क्रशिंग गतिविधि पूरी तरह बंद
यह कार्रवाई तब की गई जब पुलिस ने नियमत चेकिंग के दौरान ओवरलोडिंग की आशंका में चार टिप्पर वाहनों को रोका। जांच में पाया गया कि ड्राइवरों द्वारा प्रस्तुत अनुमति पत्रों और धर्मकांटे पर किए गए वास्तविक वजन में भारी असमानता थी। कागजों में दर्ज मात्रा की तुलना में वाहन कहीं अधिक खनिज सामग्री लेकर जा रहे थे। इससे ओवरलोडिंग के साथ–साथ खनिजों के अवैध परिवहन की पुष्टि हुई, जो खनन नियमों और पट्टे की शर्तों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है। प्रशासन का मानना है कि ऐसी गतिविधियाँ न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाती हैं बल्कि अवैध खनन को बढ़ावा देती हैं।
उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने इस मामले को गंभीर मानते हुए खनन विभाग को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके निर्देशों के पालन में माइनिंग विभाग ने विद्युत विभाग के माध्यम से क्रशर यूनिट की बिजली काट दी। जिला प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में खनन गतिविधियों की नियमित निगरानी की जाएगी और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर किसी भी इकाई को बख्शा नहीं जाएगा।गौरतलब है कि इससे पहले भी ऊना प्रशासन ने छत्रां क्षेत्र में संचालित एस.एस. स्टोन क्रशर के खिलाफ इसी तरह की कड़ी कार्रवाई करते हुए उसकी लीज को निलंबित किया था और बिजली आपूर्ति भी बंद कर दी थी।उपायुक्त जतिन लाल ने स्पष्ट कहा कि अवैध खनन, ओवरलोडिंग और नियम उल्लंघन के मामलों में जिला प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि नियम तोड़ने वाले किसी भी क्रशर या अन्य इकाई के खिलाफ कठोर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।