नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने करनाल में भाजपा के नए कार्यालय तक पहुँच मार्ग बनाने के लिए काटे गए पेड़ों के मामले में हरियाणा सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। अदालत ने भूमि आवंटन की वैधता पर विचार करने से इनकार करते हुए भी स्पष्ट निर्देश दिया कि आवासीय कॉलोनी के हरे क्षेत्र को तीन महीनों के भीतर उसकी मूल स्थिति में बहाल किया जाए।
पेड़ काटे जाने पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
जस्टिस जे.बी. पार्डीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड और तर्कों से यह स्पष्ट है कि भाजपा कार्यालय के लिए संपर्क मार्ग बनाने हेतु पेड़ों की कटाई अवैध रूप से की गई थी।
पीठ ने 1971 के युद्ध के एक पूर्व सैनिक की ओर से अधिवक्ता भूपेंद्र प्रताप सिंह द्वारा दी गई दलीलों से सहमति जताई, जिसमें कहा गया था कि पेड़ों की कटाई बिना उचित अनुमति के की गई।
सरकार की दलील से संतुष्ट नहीं हुई अदालत
हरियाणा सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने दावा किया कि भूमि आवंटन और निर्माण के लिए सभी आवश्यक अनुमतियाँ ली गई थीं और हरित मानकों का पालन किया गया था।
हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट उनकी इस दलील से संतुष्ट नहीं हुआ।सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया कि काटे गए पेड़ों के अनुपात में नए पौधे लगाए जाएंगे।
तीन महीनों में हरित क्षेत्र बहाल करने का आदेश
सर्वोच्च न्यायालय ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) और करनाल नगर निगम को निर्देश दिया कि वे संबंधित रिहायशी कॉलोनी के हरित क्षेत्र को तीन महीनों के भीतर उसकी पूर्व स्थिति में बहाल करें।
भूमि आवंटन की वैधता पर विचार से इंकार
अदालत ने यह स्पष्ट किया कि इस समय भाजपा को आवंटित भूमि की वैधता की जांच करना उचित नहीं होगा, क्योंकि मामला काफी पुराना हो चुका है।
इसलिए कोर्ट ने सिर्फ पर्यावरणीय क्षति और हरे क्षेत्र की बहाली वाले मुद्दे पर ही अपनी सीमित टिप्पणी की।