कुरुक्षेत्र। हरियाणा से भाजपा सांसद नवीन जिंदल ने लोकसभा में चुनाव सुधारों पर जोर देते हुए मतदान प्रक्रिया को और अधिक आधुनिक, सुरक्षित और सुलभ बनाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के युग में देश के करोड़ों पात्र मतदाताओं को मतदान के लिए बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है, ताकि लोकतंत्र की भागीदारी और मजबूत हो सके।
सभी नागरिकों के लिए ‘ईज़ ऑफ वोटिंग’ को प्राथमिकता मिले : जिंदल
शीतकालीन सत्र में बोलते हुए जिंदल ने कहा कि जैसे देश ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज़ ऑफ लाइफ की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है, उसी तरह अब ईज़ ऑफ वोटिंग पर भी गंभीरता से काम करने का समय आ गया है। उन्होंने बताया कि लगभग 1.5 करोड़ भारतीय विदेशों में रहते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या चुनाव के दिन भारत न पहुंच पाने के कारण मतदान नहीं कर पाती।
यह समस्या देश के भीतर भी करोड़ों कामकाजी नागरिकों के सामने आती है, जो नौकरी या अन्य कारणों से अपने शहर से बाहर रहते हैं और मतदान में भाग नहीं ले पाते।
डिजिटल इंडिया की ताकत : अब वोटिंग में तकनीक जोड़ने का समय
जिंदल ने कहा कि भारत रोज़ाना यूपीआई जैसी डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से करोड़ों सुरक्षित लेनदेन कर रहा है। इसी तरह की मजबूत साइबर सुरक्षा तकनीक का उपयोग कर देश में सुरक्षित एब्सेंटी वोटिंग और ई-वोटिंग को लागू किया जा सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक टेक्नोलॉजी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
कई देश लागू कर चुके हैं सुरक्षित रिमोट और ई-वोटिंग
सांसद जिंदल ने एस्टोनिया, फ्रांस, स्विट्जरलैंड और मेक्सिको जैसे देशों का उदाहरण देते हुए बताया कि इन देशों में सुरक्षित रिमोट वोटिंग और ई-मतदान की व्यवस्था पहले से सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है।
उन्होंने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से अपील की कि वह अंतरराष्ट्रीय प्रणालियों का अध्ययन करके भारत के लिए विश्वसनीय और सुरक्षित ई-वोटिंग मॉडल तैयार करें। जिंदल ने सुझाव दिया कि प्रवासी भारतीय और अन्य पात्र मतदाताओं को चुनाव से एक सप्ताह पहले तक ऑनलाइन या रिमोट वोटिंग का विकल्प दिया जा सकता है।
“वोट सिर्फ निशान नहीं, नागरिक की शक्ति है”
सांसद ने कहा कि लोकतंत्र का असली उत्सव तभी पूरा होता है जब हर नागरिक अपने मताधिकार का उपयोग कर सके। उन्होंने कहा “वोट केवल एक निशान नहीं, बल्कि नागरिक की पहचान, शक्ति और जिम्मेदारी है। तकनीक के जरिए इसे और सक्षम बनाया जा सकता है।”
जिंदल की यह पहल मतदान प्रक्रिया में व्यापक बदलाव और डिजिटल सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुझाव मानी जा रही है।