Mandi, Dharamveer-:मंडी जिला के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) डिपुओं में वितरित किए जा रहे गेहूं के आटे की गुणवत्ता को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष डॉ. एसपी कत्याल द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में यह पाया गया कि डिपुओं में मिलने वाले आटे में तय मानकों से कई गुना अधिक चोकर (ब्रान) मिलाया जा रहा है। इस खुलासे के बाद न केवल संबंधित सप्लाई फर्म, बल्कि स्थानीय खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आ गई है।
2 किलोग्राम आटे में निकला 490 ग्राम चोकर
शनिवार को मंडी शहर के एक पीडीएस डिपो में आयोग अध्यक्ष ने विभागीय अधिकारियों की टीम के साथ अचानक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान डिपो में मौजूद गेहूं के आटे की मौके पर ही जांच की गई। जांच प्रक्रिया के तहत 2 किलोग्राम आटे को छाननी से छानकर देखा गया, जिसमें से 490 ग्राम चोकर निकला। इसका मतलब यह हुआ कि आटे में लगभग 25 प्रतिशत चोकर मौजूद था, जबकि सरकारी मानकों के अनुसार आटे में चोकर की मात्रा अधिकतम 6 प्रतिशत ही होनी चाहिए।यदि मानकों की बात करें तो 2 किलोग्राम आटे में चोकर की मात्रा लगभग 120 ग्राम तक ही स्वीकार्य है, लेकिन निरीक्षण में इससे चार गुना अधिक चोकर पाए जाने से साफ हो गया कि लाभार्थियों को घटिया गुणवत्ता का आटा वितरित किया जा रहा है। इस जांच के बाद यह भी सामने आया कि 2 किलोग्राम आटे में केवल करीब 510 ग्राम ही उपयोग के योग्य आटा बचा, जबकि शेष हिस्सा चोकर के रूप में अलग हो गया।
पत्रकारों ने डिपुओं से मिल रहे आटे में चोकर की मात्रा अधिक होने के लगाए थे आरोप
गौरतलब है कि इससे पहले भी मंडी जिला में पीडीएस आटे की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। शनिवार को ही राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष डॉ. एसपी कत्याल ने मंडी में एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया था। प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों ने डिपुओं से मिलने वाले गेहूं के आटे में अधिक चोकर और मिलावट को लेकर सवाल किए। पहले तो अध्यक्ष इस पर स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए, लेकिन जब बार-बार यही मुद्दा उठाया गया तो उन्होंने उसी दिन डिपुओं का निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करने की बात कही।प्रेस वार्ता के कुछ ही घंटों बाद आयोग अध्यक्ष ने अपना वादा निभाते हुए विभागीय अधिकारियों के साथ मंडी शहर के एक डिपो में औचक निरीक्षण किया, जहां यह गंभीर गड़बड़ी सामने आई। निरीक्षण के बाद अध्यक्ष ने संकेत दिए कि मामले की विस्तृत जांच की जाएगी और यदि इसमें सप्लाई फर्म या विभागीय अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत पाई गई, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
चोकर, जिसे अंग्रेजी में ब्रान कहा जाता है, गेहूं जैसे अनाज की बाहरी कठोर परत होती है। पिसाई के दौरान यह परत आटे से अलग कर दी जाती है और बहुत कम मात्रा में ही आटे में छोड़ी जाती है। पीडीएस के तहत वितरित आटे में सरकार द्वारा चोकर की अधिकतम सीमा 6 प्रतिशत तय की गई है, ताकि लाभार्थियों को संतुलित और अच्छी गुणवत्ता का आटा मिल सके। लेकिन मंडी के इस डिपो में चोकर की मात्रा 25 प्रतिशत पाई जाना बेहद गंभीर मामला माना जा रहा है।
राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष डॉ एसपी कत्याल
डॉ. एसपी कत्याल ने यह भी कहा कि प्रदेश के अन्य जिलों और डिपुओं में भी आटे की गुणवत्ता की जांच करवाई जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पीडीएस के लाभार्थियों को निर्धारित मानकों के अनुसार ही खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाए।