नई दिल्ली। 16 दिसंबर 1971 भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम दिन है, जब भारत ने पाकिस्तान को निर्णायक पराजय देकर बांग्लादेश को आज़ादी दिलाई थी। इस ऐतिहासिक जीत की स्मृति में हर वर्ष 16 दिसंबर को विजय दिवस मनाया जाता है। मंगलवार को 54वें विजय दिवस के अवसर पर देशभर में वीर सैनिकों के शौर्य और बलिदान को याद किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मौके पर देशवासियों को बधाई दी और 1971 के युद्ध में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि विजय दिवस उन वीर सैनिकों की बहादुरी और त्याग का प्रतीक है, जिनके साहस और संकल्प ने 1971 के युद्ध में भारत को ऐतिहासिक सफलता दिलाई। उन्होंने कहा कि सैनिकों की निस्वार्थ सेवा और अदम्य साहस ने न केवल देश की रक्षा की, बल्कि इस दिन को इतिहास में गौरवपूर्ण क्षण के रूप में दर्ज करा दिया। प्रधानमंत्री ने शहीदों को सलाम करते हुए कहा कि उनकी वीरता आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी विजय दिवस पर देश के वीर सपूतों को नमन किया। उन्होंने कहा कि सैनिकों की बहादुरी, मातृभूमि के प्रति समर्पण और बलिदान सदैव देश को गौरवान्वित करता रहेगा। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए सेना की आत्मनिर्भरता, रणनीतिक क्षमता और आधुनिक युद्ध तकनीकों की सराहना की। उन्होंने इसे पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बताया और सैनिकों तथा उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी विजय दिवस पर सेना के शौर्य को याद किया। उन्होंने कहा कि 16 दिसंबर 1971 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान को पराजित कर बांग्लादेश को स्वतंत्रता दिलाई और विश्व के मानचित्र पर नया इतिहास रचा। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यह जीत भारतीय सैन्य शक्ति, मुक्ति वाहिनी के साहस और सैनिकों के बलिदान का प्रतीक है, जिसे देश हमेशा स्मरण रखेगा।