Shimla, 23 December-:शिमला जिला में पेयजल की गुणवत्ता और जल योजनाओं की प्रगति को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें सात डिविजनों के अंतर्गत चल रही जल योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि जिला में कुल 264 जल योजनाएं हैं, जिनमें से 203 योजनाएं भौतिक रूप से पूरी की जा चुकी हैं। इनमें से 114 योजनाएं वित्तीय रूप से भी पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि 61 योजनाओं पर अभी कार्य प्रगति पर है। उपायुक्त ने इन लंबित योजनाओं को शीघ्र पूरा करने के लिए विशेष रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि इन्हें इसी वित्तीय वर्ष में पूरा किया जा सके।उपायुक्त अनुपम कश्यप ने पंचायतों और स्कूलों की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जल शक्ति विभाग द्वारा सभी पंचायतों को पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए टेस्ट किट उपलब्ध करवाई गई हैं, लेकिन इनका उपयोग नहीं किया जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि पंचायतें इन किटों के माध्यम से नियमित रूप से पेयजल की जांच सुनिश्चित करें। साथ ही पारंपरिक जल स्रोतों की गुणवत्ता पर भी निगरानी रखी जाए।उन्होंने चिंता जताई कि जिला के स्कूलों में भी पानी जांच किट उपलब्ध होने के बावजूद उनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि केवल विभागीय स्तर पर जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि पंचायतों को अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए सक्रिय भूमिका निभानी होगी। सभी खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में किट के उपयोग को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें।
बैठक में हर घर जल योजना की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जानकारी दी गई कि इस योजना के तहत जिला में 1621 गांवों को प्रमाणित किया जा चुका है, जबकि 2536 गांवों ने रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इनमें से 915 गांवों में अभी औपचारिक प्रक्रियाएं लंबित हैं, जिन्हें जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा जिला में 3052 पेयजल स्रोतों से नियमित रूप से पानी के सैंपल लिए जा रहे हैं। उपायुक्त ने जल शक्ति विभाग के सभी अधिशासी अभियंताओं को निर्देश दिए कि आपदा के कारण क्षतिग्रस्त हुई पेयजल योजनाओं की मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार कर जिलाधीश कार्यालय को भेजें। उन्होंने बताया कि दो लाख रुपये तक के मरम्मत कार्यों के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तहत तत्काल बजट उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि पेयजल आपूर्ति बाधित न हो।उपायुक्त ने कहा कि स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल हर नागरिक का अधिकार है और इसके लिए प्रशासन, विभागों, पंचायतों और स्कूलों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।बैठक में जल योजनाओं की गुणवत्ता, समयबद्ध पूर्णता और जनभागीदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।