बांग्लादेश | बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के शीर्ष नेता तारिक रहमान करीब 17 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद लंदन से स्वदेश लौट आए हैं। उनके ढाका पहुंचते ही हजारों समर्थक सड़कों पर उतर आए और जोरदार स्वागत किया, जिससे साफ संकेत मिला कि बीएनपी उन्हें फिर से सक्रिय राजनीति के केंद्र में लाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
गुरुवार को ढाका में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए तारिक रहमान ने भविष्य की राजनीति को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। उनके भाषण और हाव-भाव से यह जाहिर हुआ कि वे अब पूरी ताकत के साथ राजनीतिक मैदान में उतरने जा रहे हैं। इसी के साथ यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या आने वाले समय में वे बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार बन सकते हैं।
हालांकि, तारिक रहमान की वापसी को लेकर भारत समेत क्षेत्रीय सुरक्षा एजेंसियां सतर्क नजर आ रही हैं। उन पर पहले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से संपर्क और भारत-विरोधी गतिविधियों से जुड़े आरोप लग चुके हैं, जिसे लेकर नई दिल्ली फूंक-फूंक कर कदम रखने की रणनीति अपना रही है।
तख्तापलट और राजनीतिक उथल-पुथल से जुड़ा नाम
पिछले वर्ष बांग्लादेश में हुए राजनीतिक तख्तापलट के दौरान बीएनपी की भूमिका को अहम माना गया था। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में यह सामने आया था कि सोशल मीडिया के जरिए माहौल को भड़काने में विदेश से संगठित प्रयास किए गए, जिनमें पाकिस्तान से जुड़ी गतिविधियों के संकेत मिले थे। इन घटनाओं के बाद तारिक रहमान और बीएनपी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गए।
राजनीतिक विरासत से निकला प्रभावशाली चेहरा
तारिक रहमान बांग्लादेश के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वे पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र हैं, जबकि उनके पिता जियाउर रहमान देश के पूर्व राष्ट्रपति और सेना प्रमुख रह चुके हैं। वर्तमान में तारिक रहमान बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और लंबे समय से पार्टी की रणनीति और दिशा तय करने में उनकी निर्णायक भूमिका मानी जाती है।
विवादों से घिरा रहा सफर
तारिक रहमान का राजनीतिक जीवन विवादों से भी भरा रहा है। उन पर भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप लगे। ‘हवा भवन’ के जरिए अवैध वसूली के आरोपों के बाद वर्ष 2007 में भ्रष्टाचार विरोधी आयोग ने उनके खिलाफ जांच शुरू की थी। इस मामले में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों तक की दखल देखने को मिली।
मनी लॉन्ड्रिंग केस से राहत, वापसी का रास्ता साफ
जांच एजेंसियों के अनुसार, तारिक रहमान पर करोड़ों डॉलर विदेश भेजने के आरोप थे। इन्हीं मामलों के चलते वे लंबे समय तक लंदन में रहे। हालांकि, 20 मार्च 2025 को अदालत से मनी लॉन्ड्रिंग के एक अहम मामले में बरी होने के बाद उनकी बांग्लादेश वापसी का मार्ग प्रशस्त हुआ।
क्या सत्ता की दहलीज पर खड़े हैं तारिक?
बीएनपी समर्थक तारिक रहमान को पार्टी का भविष्य और संभावित प्रधानमंत्री मान रहे हैं। मौजूदा राजनीतिक हालात में, जब शेख हसीना की पार्टी को चुनावी प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है, बीएनपी की सत्ता में वापसी की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं। ऐसे में अगर पार्टी चुनाव जीतती है, तो तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार बनने की अटकलें तेज हो गई हैं।
17 साल बाद हुई यह वापसी बांग्लादेश की राजनीति को एक नए मोड़ पर ले आई है। समर्थकों में उत्साह चरम पर है, जबकि विरोधी इसे सत्ता हथियाने की तैयारी बता रहे हैं। अब सबकी नजरें आने वाले चुनावों पर टिकी हैं, जो तय करेंगे कि क्या तारिक रहमान सच में बांग्लादेश की राजनीति के अगले सबसे बड़े चेहरे बनेंगे या नहीं।