चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों पर विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान कांग्रेस विधायकों को भाजपा की तुलना में अधिक समय बोलने का अवसर मिला और यह कहना गलत है कि विपक्ष को पर्याप्त मंच नहीं दिया गया।
विधानसभा सचिवालय में मीडिया से बातचीत करते हुए अध्यक्ष ने बताया कि शीतकालीन सत्र में कुल 16 विधेयक पारित किए गए। इन विधेयकों के साथ-साथ जनता से जुड़े अहम मुद्दों, चुनाव सुधारों से जुड़ी स्थिति और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
अध्यक्ष के अनुसार, तीन दिनों में आयोजित चार बैठकों के दौरान सदन की कार्यवाही 23 घंटे 45 मिनट चली और कार्य-उत्पादकता 100 प्रतिशत से अधिक रही। सत्र में सभी 74 विधायक उपस्थित रहे। शून्यकाल की कुल अवधि तीन घंटे 18 मिनट रही, जिसमें कांग्रेस के 33 विधायकों ने 94 मिनट और भाजपा के 32 विधायकों ने 91 मिनट तक अपनी बात रखी। इनेलो और निर्दलीय विधायकों को भी बोलने का अवसर दिया गया।
प्रश्नकाल के दौरान 81 तारांकित प्रश्न स्वीकार किए गए, जिनमें से 47 के मौखिक उत्तर दिए गए। इन प्रश्नों में कांग्रेस विधायकों की संख्या सबसे अधिक रही। इसके अलावा 30 अतारांकित प्रश्नों के जवाब सदन पटल पर रखे गए। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि विपक्ष की ओर से उठाए गए हर मुद्दे पर किसी न किसी रूप में चर्चा की गई।
चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान हंगामे की स्थिति भी बनी, जिसके चलते नियमों के तहत कांग्रेस के नौ सदस्यों को नेम किया गया। हालांकि स्थिति सामान्य होने पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के आग्रह पर उन्हें वापस बुला लिया गया।
अध्यक्ष ने यह भी बताया कि सत्र के दौरान 1058 दर्शकों ने विधानसभा की कार्यवाही देखी, जिनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल थे। इसके अलावा कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर करीब चार घंटे 40 मिनट की लंबी चर्चा हुई, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
कुल मिलाकर, विधानसभा अध्यक्ष ने दो टूक कहा कि शीतकालीन सत्र लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप चला और विपक्ष को बोलने के लिए पर्याप्त अवसर दिए गए।