नई दिल्ली | भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की सुनवाई पर ऐतिहासिक फैसला लिया है। इस फैसले के अनुसार, अब किसी भी व्यक्ति को लीगल इमरजेंसी की स्थिति में किसी भी समय अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार मिलेगा।
CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी की गिरफ्तारी की धमकी दी जा रही हो या मौलिक अधिकारों का हनन होने का खतरा हो, तो आधी रात में भी सुनवाई की मांग की जा सकती है। उनका कहना है कि न्यायालय जनता के लिए हमेशा सुलभ रहना चाहिए और अदालतों की कार्यवाही स्थगित होने के बाद भी लीगल इमरजेंसी में कोर्ट तक पहुंच संभव हो।
इसके साथ ही, लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए अधिक से अधिक संवैधानिक पीठों का गठन करने पर विचार किया जा रहा है। इनमें SIR प्रक्रिया से जुड़े मामले और अन्य संवैधानिक मुद्दे शामिल हैं। CJI ने यह भी सुझाव दिया कि जरूरी मामलों के लिए नौ सदस्यीय पीठ का गठन किया जा सकता है, जैसे कि सबरीमाला मंदिर मामले में महिला प्रवेश अधिकार को लेकर दायर याचिकाओं के लिए।
वकीलों के लिए भी नए दिशा-निर्देश लागू किए गए हैं। महत्वपूर्ण मामलों में वकील अब अपनी दलीलें तय समय सीमा के भीतर प्रस्तुत करेंगे। इससे बहस में अनावश्यक विलंब रोका जाएगा और मामलों का निपटारा तेजी से संभव होगा।
इतिहास में देखा जाए तो सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कई महत्वपूर्ण मामलों में आधी रात को सुनवाई की है। इनमें 2005-06 का निठारी कांड, 1992 का अयोध्या विवाद, 2018 का कर्नाटक सरकार मामला और 1993 में याकूब मेमन की फांसी शामिल हैं।
CJI सूर्यकांत का यह निर्णय न्यायपालिका की सुलभता और मौलिक अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।