करनाल | केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने स्पष्ट किया है कि धान घोटाले में शामिल दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि जहां भी अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आएगा, वहां कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। शनिवार को करनाल दौरे के दौरान विकास कार्यों की समीक्षा करने के बाद पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने यह बात कही।
केंद्रीय मंत्री ने अवैध कॉलोनियों के निर्माण पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वे शुरू से ही अवैध कॉलोनियों के खिलाफ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार नियमानुसार कॉलोनियों के विकास के लिए लाइसेंस देती है, ताकि नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। लेकिन कुछ लोग लालच में आकर नियमों की अनदेखी करते हैं, जिससे अवैध कॉलोनियों का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
पूर्व डिप्टी मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला द्वारा लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए मनोहर लाल ने कहा कि यदि अवैध कॉलोनियां सरकार से जुड़े लोग ही काट रहे हैं, तो उनके नाम सार्वजनिक किए जाएं, ताकि सबसे पहले उन्हीं की जांच की जा सके। उन्होंने कहा कि केवल आरोप लगाना उचित नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि कांग्रेस और पिछली सरकारों के कार्यकाल में सबसे अधिक अवैध कॉलोनियां विकसित हुईं, जबकि मौजूदा सरकार ने राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर कई अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त किया है।
धान घोटाले को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार की नीति बिल्कुल स्पष्ट है। जहां भी गड़बड़ी सामने आती है, वहां सबसे पहले एफआईआर दर्ज की जाती है। कई मामलों में इससे ही सुधार हो जाता है, लेकिन गंभीर मामलों में कठोर दंडात्मक कार्रवाई भी की जाती है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि करनाल सहित प्रदेश के कई स्थानों पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और भविष्य में भी किसी को संरक्षण नहीं मिलेगा।
मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों पर केंद्रीय मंत्री ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं और इनमें स्थानीय निकायों व राज्य सरकारों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि जहां भी सिस्टम में खामी हो, उसे तुरंत ठीक किया जाना चाहिए और यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सतर्कता और जवाबदेही ही ऐसी घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है और प्रशासन को इस दिशा में गंभीरता से कार्य करना होगा।