चंडीगढ़। उत्तर भारत में लगातार बढ़ रही ठंड और संभावित शीतलहर को देखते हुए हरियाणा सरकार ने आमजन की सुरक्षा के लिए शीतलहर कार्य योजना तैयार की है। इस योजना का उद्देश्य शीतलहर और पाले से होने वाले स्वास्थ्य, कृषि और पशुधन संबंधी नुकसान को न्यूनतम करना है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त एवं मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश जारी किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन, विकास एवं पंचायत, शिक्षा, शहरी स्थानीय निकाय समेत सभी विभागों को अपने-अपने क्षेत्र में तत्काल और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि जनवरी 2025 में चंडीगढ़, अंबाला, करनाल और हिसार में शीतलहर का गंभीर असर देखा गया था और वर्ष 2026 के पहले सप्ताह में भी ऐसी ही परिस्थितियां बन रही हैं। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे प्रतिदिन रेडियो, टीवी, समाचार पत्रों और स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें, ताकि समय रहते शीतलहर की चेतावनी मिल सके।
मुख्य सचिव ने लोगों को सलाह दी कि वे गर्म कपड़े, आवश्यक दवाइयां और जरूरी सामग्री पहले से सुरक्षित रखें। लंबे समय तक ठंड के संपर्क में रहने से सर्दी-जुकाम, फ्लू, नाक बहना या बंद होना, नाक से खून आना जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। उन्होंने ठंडी हवा के सीधे संपर्क से बचने, घर के अंदर रहने और अनावश्यक यात्रा से परहेज करने की भी सलाह दी।
शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए विटामिन-सी युक्त आहार, फल और हरी सब्जियों का सेवन करने तथा नियमित रूप से गर्म तरल पदार्थ लेने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही बुजुर्गों, बच्चों और अकेले रहने वाले पड़ोसियों का विशेष ध्यान रखने की अपील की गई।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि शरीर की अधिकांश ऊष्मा सिर, गर्दन, हाथ और पैरों से निकलती है, इसलिए इन अंगों को अच्छी तरह ढककर रखें। त्वचा को सूखने से बचाने के लिए नियमित रूप से तेल, पेट्रोलियम जेली या बॉडी क्रीम का उपयोग करें। पालतू जानवरों और मवेशियों को ठंड से बचाने के लिए उन्हें सुरक्षित और गर्म स्थानों पर रखें।
उन्होंने बताया कि हाइपोथर्मिया की स्थिति में प्रभावित व्यक्ति को तुरंत गर्म स्थान पर ले जाएं, गीले कपड़े बदलकर सूखे कपड़े पहनाएं, कंबल या चादर ओढ़ाएं और गर्म पेय पदार्थ दें। शराब का सेवन न कराएं और स्थिति गंभीर होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करें।
किसानों और पशुपालकों के लिए एडवाइजरी
शीतलहर और पाला फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि वे बोर्डो मिश्रण या कॉपर ऑक्सी-क्लोराइड का छिड़काव करें तथा फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग करें। शीतलहर के दौरान हल्की और बार-बार सिंचाई करें तथा जहां संभव हो स्प्रिंकलर सिंचाई अपनाएं। नर्सरी और छोटे पौधों को प्लास्टिक, पुआल या सरकंडा घास से ढककर सुरक्षित रखें।
सलाह दी गई है कि शीतलहर के समय मिट्टी में पोषक तत्व न डालें, क्योंकि ठंड में जड़ों की सक्रियता कम हो जाती है। पशुपालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पशुओं को ठंडी हवाओं से बचाएं, उन्हें घर के अंदर रखें, उच्च गुणवत्ता वाला चारा, ऊर्जा युक्त आहार और संतुलित राशन उपलब्ध कराएं। शीतलहर के दौरान पशुओं को खुले में न बांधें, पशु मेलों के आयोजन से बचें और ठंडा चारा व पानी देने से परहेज करें।