ईरान | पश्चिम एशिया में ईरान और इज़राइल के बीच जारी टकराव अब बेहद खतरनाक दिशा में बढ़ गया है। इज़राइली वायुसेना ने ईरान के अराक स्थित भारी जल रिएक्टर को निशाना बनाते हुए हमला किया है। यह वही रिएक्टर है जिसे प्लूटोनियम उत्पादन के माध्यम से परमाणु हथियारों से जोड़ा जाता रहा है। यह ठिकाना राजधानी तेहरान से करीब 250 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।
ईरान के सरकारी टेलीविजन चैनल के अनुसार, हमले से पहले ही रिएक्टर को एहतियातन खाली करा लिया गया था और फिलहाल किसी भी तरह के विकिरण खतरे की पुष्टि नहीं हुई है। इज़राइली सेना ने इस कार्रवाई से पहले ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर चेतावनी जारी करते हुए स्थानीय लोगों से क्षेत्र खाली करने की अपील की थी।
सैटेलाइट इमेज के जरिए टारगेट की जानकारी दी
इज़राइल ने हमले के बाद सैटेलाइट इमेज जारी की, जिसमें रिएक्टर के संभावित निशाने को लाल घेरे में दर्शाया गया था। वाशिंगटन स्थित एक मानवाधिकार संगठन के अनुसार, इस हमले सहित हालिया संघर्षों में अब तक ईरान में 639 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 263 आम नागरिक और 154 सुरक्षाबल के सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा करीब 1,329 लोग घायल हुए हैं।
ईरान ने भी किया जवाबी हमला
इज़राइली हमले के कुछ घंटों के भीतर ही ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इज़राइल के कई नागरिक इलाकों पर मिसाइलें दागीं। इनमें एक अस्पताल भवन और कई रिहायशी अपार्टमेंट्स को निशाना बनाया गया। दमकल विभाग के अनुसार, मिसाइलें सीधे इमारतों से टकराईं, हालांकि अब तक किसी हताहत की पुष्टि नहीं हुई है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ी
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था IAEA ने इज़राइल से अपील की थी कि वह ईरान के परमाणु केंद्रों को निशाना न बनाए। एजेंसी ने 14 मई को अराक रिएक्टर का निरीक्षण किया था। लेकिन अब हुए इस हमले के बाद वैश्विक स्तर पर चिंता गहराने लगी है कि यह टकराव कहीं परमाणु संकट में न तब्दील हो जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों द्वारा रणनीतिक और संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाए जाने से पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ने की आशंका है। स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी और कूटनीतिक प्रयासों की जरूरत अब पहले से कहीं अधिक हो गई है।