Mandi, Dharamveer-:हिमाचल प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रशासन द्वारा कथित कब्जाधारियों को जारी किए जा रहे बेदखली नोटिसों पर हिमाचल किसान सभा ने कड़ा ऐतराज जताया है। किसान सभा ने इसे शीर्ष अदालत के आदेशों की खुली अवहेलना करार देते हुए तुरंत इस प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है।इस मुद्दे को लेकर हिमाचल किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल ने मंडी में धरना-प्रदर्शन किया और उसके बाद उपायुक्त मंडी को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि जब तक प्रदेश सरकार अवैध कब्जों को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाती, तब तक किसी भी प्रकार के बेदखली नोटिस जारी न किए जाएं।
हिमाचल किसान सभा के राज्य महासचिव एवं पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में अवैध कब्जों के मामलों में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं और प्रदेश सरकार को इस विषय पर नीति तैयार करने को कहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नीति बनाने में विफल रही है, जबकि प्रशासन कब्जाधारियों को बेदखली के नोटिस भेज रहा है, जो सीधे तौर पर अदालत के आदेशों की अवहेलना है।राकेश सिंघा ने चेतावनी दी कि यदि अधिकारियों ने नोटिस जारी करने की प्रक्रिया बंद नहीं की, तो किसान सभा ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का मामला दायर करेगी। उन्होंने कहा कि गरीब और छोटे किसानों को जबरन बेदखल करना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस मौके पर मंडी जिला किसान सभा के अध्यक्ष कुशाल भारद्वाज ने कहा कि संगठन लंबे समय से सरकार से यह मांग करता आ रहा है कि पांच बीघा तक की कब्जाधीन भूमि को निशुल्क कब्जाधारकों के नाम नियमित किया जाए, जबकि इससे अधिक भूमि को बाजार दरों पर हस्तांतरित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति भूमि हदबंदी कानून से अधिक जमीन पर काबिज है, तो ऐसी भूमि को सरकार अपने अधीन ले।
सरकार से जल्द से जल्द अवैध कब्जों को लेकर नीति बनाने की उठाई मांग
किसान सभा ने केंद्र सरकार से भी मांग की है कि वन अधिनियम के तहत हिमाचल प्रदेश की वन भूमि के अधिकार प्रदेश सरकार को सौंपे जाएं, ताकि राज्य सरकार स्थानीय जरूरतों के अनुसार भूमि का उपयोग कर सके। संगठन का कहना है कि आपदा प्रभावित परिवारों को जमीन उपलब्ध कराने में सरकार को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।किसान सभा ने प्रदेश सरकार को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कब्जाधारकों को लेकर कोई ठोस और न्यायसंगत नीति नहीं बनाई गई, तो संगठन प्रदेशभर में सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगा।