यमुनानगर। चरखी दादरी के 30 वर्षीय जयवीर की कहानी प्रेरक है। 2013 में हुए एक गंभीर सड़क हादसे में उनका दाहिना पैर कट गया और सेना में भर्ती होने का सपना अधूरा रह गया। हादसे ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। तीन साल तक मानसिक और भावनात्मक संघर्ष झेलने के बाद जयवीर ने पैरा खेलों की ओर रुख किया।
जयवीर ने अपने संघर्ष और मेहनत से पैरा ताइक्वांडो सहित विभिन्न पैरा खेलों में सात पदक जीते हैं। हाल ही में पंचकुला में हुई हरियाणा ओपन स्टेट पैरा ताइक्वांडो प्रतियोगिता में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर सबको चौंका दिया। इसके अलावा, भाला फेंक (2018 में स्वर्ण), पैरा फुटबाल (2019, 2022, 2024 में पदक), योगासन (2023 में स्वर्ण) और राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक समेत कई प्रतियोगिताओं में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया।
जयवीर का मानना है कि शरीर भले सीमित हो, लेकिन सपनों की कोई सीमा नहीं होती। उनके लिए खेल केवल प्रतियोगिता का माध्यम नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान लौटाने का जरिया भी है। उन्होंने साबित किया कि कठिनाइयाँ जज्बे और मेहनत को रोक नहीं सकतीं।
जयवीर अब पैरा ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने और पदक जीतने का लक्ष्य रखते हैं। उनकी कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो किसी न किसी वजह से खुद को कमजोर मान लेते हैं। जयवीर ने दिखाया कि अगर हौसला और जज्बा मजबूत हो तो जीवन में असंभव भी संभव हो सकता है।