Shimla, 18 January-:दिल्ली से लौटते ही हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। राजधानी शिमला के सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया, जब मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि आने वाले समय में मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है, जब सुक्खू दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने शिमला में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि सरकार नई योजनाओं के साथ जनता के सामने आएगी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विश्लेषक कैबिनेट में बड़े बदलाव की संभावनाओं को लेकर अटकलें लगा रहे हैं।
खड़गे से मुलाकात का राजनीतिक महत्व
सुक्खू की दिल्ली यात्रा के दौरान हुई खड़गे से मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार इस बैठक में संगठन और सरकार के बीच समन्वय, मंत्रियों के प्रदर्शन और आगामी रणनीति पर चर्चा हुई होगी। इसी बैठक के बाद कैबिनेट फेरबदल के संकेत मिलने से सियासी कयासों को और बल मिला।
IAS-IPS अधिकारियों पर बयानबाजी
प्रदेश में बाहरी राज्यों से आए IAS और IPS अधिकारियों को लेकर भी राजनीतिक घमासान जारी है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बाहरी अधिकारियों पर कटाक्ष किया, वहीं राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह और तकनीकी शिक्षा मंत्री ने इन अधिकारियों का बचाव किया।
दिल्ली में वित्तीय और GST मुद्दों पर चर्चा
दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री से 16वें वित्त आयोग की RDG राशि को समान रूप से जारी रखने का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि 15वें वित्त आयोग में हिमाचल को लगभग 40 हजार करोड़ रुपये मिले, लेकिन 2025-26 में यह राशि घटकर केवल 3200 करोड़ रुपये रह गई।सुक्खू ने GST से हिमाचल को हुए नुकसान पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि GST लागू होने के बाद प्रदेश को वैट और एक्साइज से मिलने वाली आय घटकर बद्दी क्षेत्र में केवल 150 करोड़ रह गई। सीमेंट उद्योग पर टैक्स घटने से भविष्य में प्रदेश को कोई बड़ा लाभ नहीं मिलने वाला।
डिजास्टर पैरामीटर और OPS पर चर्चा
मुख्यमंत्री ने डिजास्टर पैरामीटर में बदलाव की मांग भी की और OPS से केंद्र से मिलने वाली 1600 करोड़ रुपये की बॉरोइंग पर स्पष्ट किया कि इसके बावजूद कर्मचारियों के हितों की रक्षा की गई।
मुख्यमंत्री सुक्खू के इन बयानों और दिल्ली दौरों के बाद प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अब कैबिनेट फेरबदल, नई योजनाओं और वित्तीय मांगों को लेकर जनता और राजनीतिक गलियारों की निगाहें मुख्यमंत्री कार्यालय पर हैं।