चंडीगढ़ | कसौली दुष्कर्म मामले में हरियाणा भाजपा अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली और गायक रॉकी मित्तल को दूसरी बार क्लीनचिट मिल गई है। कसौली अदालत ने इस प्रकरण में सभी आरोपों को खारिज करते हुए केस बंद करने के आदेश दिए हैं। अपने 20 पन्नों के विस्तृत फैसले में अदालत ने शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए तमाम आरोपों को निराधार करार दिया है और आगे किसी भी जांच को कानून का दुरुपयोग बताया है।
कसौली कोर्ट के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अशोक कुमार ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि मामले में दोबारा जांच की कोई आवश्यकता नहीं है। अदालत ने शिकायतकर्ता की ओर से दाखिल विरोध याचिका को भी कानूनी रूप से अस्थिर मानते हुए खारिज कर दिया और पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए केस को समाप्त करने का आदेश दिया।
क्लोजर रिपोर्ट में शिकायतकर्ता पर उठे गंभीर सवाल
पुलिस की ओर से दाखिल दूसरी क्लोजर रिपोर्ट में शिकायतकर्ता युवती के खिलाफ कई अहम तथ्य सामने रखे गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कथित दुष्कर्म की घटना के करीब 18 महीने बाद मामला दर्ज कराया गया, जिसे अदालत ने संदेहास्पद माना। इसके अलावा, पुलिस के बार-बार अनुरोध के बावजूद शिकायतकर्ता ने मेडिकल जांच कराने से इनकार किया, जबकि दुष्कर्म के मामलों में मेडिकल परीक्षण को अहम सबूत माना जाता है।
गवाहों के बयान और जांच प्रक्रिया पर कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच निष्पक्ष और विस्तृत रही है। केस डायरी के अनुसार, होटल कर्मचारियों, अन्य मेहमानों और सभी जरूरी गवाहों के बयान दर्ज किए गए। होटल का रिकॉर्ड भी जांच में शामिल किया गया। शिकायतकर्ता के साथ मौजूद महिला ने भी दुष्कर्म की घटना से साफ इनकार किया, जिससे आरोप और कमजोर हुए।
शिकायतकर्ता के बयान में विरोधाभास
रिपोर्ट में यह तथ्य भी सामने आया कि शिकायतकर्ता का बॉस उसी होटल के एक अन्य कमरे में ठहरा हुआ था। इसके बावजूद, कथित घटना के दौरान या बाद में बॉस द्वारा किसी तरह की मदद या प्रतिक्रिया न देना, शिकायतकर्ता के दावे को कमजोर करता है। पुलिस के अनुसार, यदि कोई गंभीर घटना हुई होती तो तत्काल प्रतिक्रिया की उम्मीद की जाती।
घटनास्थल की पहचान पर भी संदेह
क्लोजर रिपोर्ट में बताया गया कि शिकायतकर्ता और उसके साथियों ने कसौली पहुंचने के बाद काफी समय तक वहीं रुककर जांच प्रक्रिया को प्रभावित किया। कथित घटनास्थल के रूप में होटल के कमरे की पहचान भी काफी देरी से, 16 दिसंबर 2025 को की गई, जब एक साथी ने स्वयं उस कमरे में ठहरकर पुष्टि की।
जबरदस्ती या हिंसा के स्पष्ट प्रमाण नहीं
पुलिस रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि एफआईआर और बयानों में कहीं भी यह स्पष्ट नहीं है कि शिकायतकर्ता या उसकी साथी को शारीरिक बल प्रयोग कर नशीला पेय पिलाया गया हो। बयान में पेय पदार्थ परोसने और पीने के लिए कहे जाने का जिक्र है, लेकिन जबरदस्ती या हिंसा का कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया।
इन सभी तथ्यों के आधार पर अदालत ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को सही ठहराते हुए मामले को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।